हिंदी

त्योहार मनाने के उद्देश्य की वैज्ञानिकता सुनो और सुनाओ।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

त्योहार मनाने के उद्देश्य की वैज्ञानिकता सुनो और सुनाओ।

कृति
Advertisements

उत्तर

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक त्योहार धार्मिक होने के बावजूद अपने आप में वैज्ञानिक महत्त्व रखता है। वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध किया है कि हमारे त्योहार केवल परंपरा या उल्लास का अवसर नहीं होते, बल्कि समाज की सामूहिक आवश्यकताओं और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं। दरअसल, ये उत्सव लोगों की सामाजिक, शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ति का एक साधन रहे हैं। जीवन को आनंदमय बनाने, पुण्य कर्म की ओर अग्रसर होने और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए ही त्योहारों का उद्भव और विकास हुआ है।

त्योहारों के वैज्ञानिक उद्देश्य को समझाने के लिए होली का उदाहरण उपयुक्त है:

  • होलिकादहन की अग्नि की दिशा: राजस्थान के किसान अग्नि की लपट की दिशा देखकर वर्षा की संभावनाओं का अनुमान लगाते हैं। यह स्थानीय जलवायु संकेतों का उपयोग है, जिसका वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण आधार है।
  • भस्म का उपयोग: होलिका दहन की भस्म को अनाज में डालने से कीटों से सुरक्षा होती है। भस्म में रोगाणुरोधक गुण होते हैं जो अनाज को सुरक्षित रखते हैं।
  • प्राकृतिक रंगों का प्रयोग: परंपरागत रूप से होली के रंग (जैसे गोबर, मिट्टी का घोल) त्वचा के रोगों को दूर रखने में सहायक होते थे। गर्मी में होने वाले चर्म रोगों और पित्तजन्य बीमारियों से सुरक्षा मिलती थी।
  • सफाई और स्वच्छता: त्योहारों के दौरान घर-आंगन की साफ-सफाई का विशेष महत्व होता है। यह स्वच्छता वातावरण को स्वस्थ बनाती है और संक्रमण से बचाव में मददगार होती है।

इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि त्योहार केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि समाज और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी आवश्यक हैं। इनका वैज्ञानिक आधार हमारी परंपरा की गहराई को दर्शाता है और “सुनो और सुनाओ” का संदेश भी देता है—जब हम इन्हें खुद समझते हैं और दूसरों को भी बताते हैं।

इस प्रकार, हमारे त्योहारों में छिपा वैज्ञानिक ज्ञान हमें प्रकृति और समाज के साथ तालमेल बिठाने की प्रेरणा देता है।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2.02: बेटी युग - सुनो तो जरा [पृष्ठ २९]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 2.02 बेटी युग
सुनो तो जरा | Q (१) | पृष्ठ २९
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 10 बेटी युग
पाठ्य प्रश्न | Q ७. | पृष्ठ ५८

संबंधित प्रश्न

मैंने समझा जरा प्यार से बोलना सीख लीजे कविता से 


‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।


मैंने समझा दो लघुकथाएँ पाठ से 


मैंने समझा अंधायुग कविता से।  


।।श्रद्‌धा और विज्ञान, जीवन के दो पक्ष महान।।


मैंने समझा बेटी युग कविता से 


यदि तुम सैनिक होते तो .....


यदि प्रकृति में सुंदर - सुंदर रंग नहीं होते तो ..........


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


भारतीय स्थानीय समय के अनुसार देश-विदेश के समय की तालिका बनाओ।


किसी एक संस्मरणीय घटना का वर्णन करो।


पढ़ाई का नियोजन करते हुए अपनी दिनचर्या लिखो।


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:


अपना परिचय देते हुए परिवार के बारे में दस वाक्य लिखो।


अपनी कक्षा द्‍वारा की गई किसी क्षेत्रभेंट का वर्णन लिखिए।


आपने समाचारपत्रों, टी.वी. आदि पर अनेक प्रकार के विज्ञापन देखे होंगे जिनमें ग्राहकों को हर तरीके से लुभाने का प्रयास किया जाता है, नीचे लिखे बिंदुओं के संदर्भ में किसी एक विज्ञापन की समीक्षा कीजिए और यह लिखिए कि आपको विज्ञापन की किस बात से सामान खरीदने के लिए प्रेरित किया।

  1. विज्ञापन में सम्मिलित चित्र और विषय-वस्तु
  2. विज्ञापन में आए पात्र व उनका औचित्य
  3. विज्ञापन की भाषा

निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -

परीक्षा के दिन


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×