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नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।

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प्रश्न

नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।

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उत्तर

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा ना कोय।। - (कबीर)

या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोइ।
ज्यों-ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होइ।। - (बिहारी)

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
तोड़े से फिर ना जुरै, जुरै गाँठ पिड़ जाय।। - (रहीम)

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 1.1: सोई मेरी छौना रे ! - सोई मेरी छौना रे ! [पृष्ठ २५]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
अध्याय 1.1 सोई मेरी छौना रे !
सोई मेरी छौना रे ! | Q (६) | पृष्ठ २५

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