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प्रश्न
नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।
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उत्तर
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा ना कोय।। - (कबीर)
या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोइ।
ज्यों-ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होइ।। - (बिहारी)
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
तोड़े से फिर ना जुरै, जुरै गाँठ पिड़ जाय।। - (रहीम)
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