Advertisements
Advertisements
Question
नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।
Advertisements
Solution
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा ना कोय।। - (कबीर)
या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोइ।
ज्यों-ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होइ।। - (बिहारी)
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
तोड़े से फिर ना जुरै, जुरै गाँठ पिड़ जाय।। - (रहीम)
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
मैंने समझा स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है पाठ से
स्वामी विवेकानंद का कोई भाषण पढ़ो और प्रमुख वाक्य बताओ।
मैंने समझा जीवन नहीं मरा करता है कविता से

चित्रों को पहचानकर जलचर, नभचर, थलचर और उभयचर प्राणियों में वर्गीकरण करो।

वैज्ञानिक की जीवनी पढ़ो और उसके आविष्कार लिखो।
मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो :

मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए:
एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - हंस का इनकार - कौए का घसीटकर ले जाना - कौए का चोंच नचा - नचाकर दही खाना - हंस का बिलकुल न खाना - आहट पाकर कौए का उड़ जाना - हंस का पकड़ा जाना - परिणाम - शीर्षक।
Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:
नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।
पहले अपने गली-मोहल्ले की दुकानों से खरीदारी की जाती थी। पर अब 'ऑनलाइन' खरीदारी का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। इस परिवर्तन का समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा हैं? समझाकर लिखिए।
