Advertisements
Advertisements
Question
नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।
Short/Brief Note
Advertisements
Solution
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा ना कोय।। - (कबीर)
या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोइ।
ज्यों-ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होइ।। - (बिहारी)
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
तोड़े से फिर ना जुरै, जुरै गाँठ पिड़ जाय।। - (रहीम)
shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
Is there an error in this question or solution?
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
वृक्ष और पंछी के बीच का संवाद लिखो।
‘भोजन का प्रभाव’- टिप्पणी लिखो।


दिए गए मुद्दों के आधार पर कहानी लिखो :
| गॉंव में मेला देखने वालों की भीड़ | → | सड़क पर प्रवेश द्वार के बीचोंबीच बड़ा-सा पत्थर | → | पत्थर से टकराकर छोटे-बड़ों का गिरना-पड़ना। | → | बहुत देर से लड़के का देखना |
| लड़के द्वारा पत्थर हटाना, उसके नीचे चिट्ठी पाना | → | चिट्ठी में लिखा था ........? | → | पुरस्कार पाना। | → | सीख और शीर्षक |
निम्नलिखित शब्द की सहायता से नए शब्द बनाओ:

हजारी प्रसाद द्विवेदी की ‘कबीर ग्रंथावली’ से पाँच दोहे ढूँढकर सुंदर अक्षरों में लिखो।
चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________
निम्नलिखित चित्रों के नाम बताओ और जानकारी लिखो।

बस/रेल स्थानक की सूचनाऍं ध्यानपूर्वक सुनकर सुनाओ।
