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यदि तुम पशु-पक्षियों की बोलियाँ समझ पाते तो ..... - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

यदि तुम पशु-पक्षियों की बोलियाँ समझ पाते तो ..... 

दीर्घउत्तर
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उत्तर

  • यदि मैं पशु-पक्षियों की बोलियाँ समझ पाता, तो यह दुनिया मेरे लिए और भी अनोखी और जादुई हो जाती। मैं उनके भावनाओं, जरूरतों और परेशानियों को बेहतर तरीके से समझ सकता।
  • मैं पक्षियों से पूछता कि वे इतनी ऊँचाई तक कैसे उड़ते हैं, पेड़ों पर बसेरा क्यों पसंद करते हैं, और वे मौसम के बदलाव को पहले से कैसे जान लेते हैं। मैं कुत्तों और बिल्लियों से उनकी भाषा में बात करता और उनके मन की बात समझने की कोशिश करता। जंगल के जानवरों से बातचीत कर यह जानता कि वे इंसानों से क्या चाहते हैं और किस तरह से पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
  • मैं सभी पशु-पक्षियों से बातचीत कर उनका दुख-सुख सुनता। यदि किसी पशु या पक्षी को कोई कष्ट होता, तो मैं उससे बातचीत कर उसकी तकलीफ अथवा समस्या को दूर करने का प्रयास करता। मैं उनके साथ खेलता-कूदता। उनके और अपने जीवन के अनुभवों को साझा करता। मैं पशु-पक्षियों के साथ सैर पर जाता। मैं उनसे उनके समाज, परिवार और पूर्वजों के बारे में चर्चा करता व उन्हें भी अपने समाज, परिवार आदि से परिचित करवाता। मैं पशु-पक्षियों से उनकी रुचियों के बारे में पूछता और उन्हें भी अपनी रुचियों से अवगत कराता।
  • हम उनके दर्द और खुशी को महसूस कर पाते। हम उन्हें बेहतर सुरक्षा और प्यार दे सकते और उनके साथ बेहतर रिश्ता बना सकते। इससे प्रकृति और मनुष्य के बीच एक नया संवाद स्थापित हो जाता, जो हमें और अधिक संवेदनशील और दयालु बनाता।
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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 2.04: शब्द संपदा - जरा सोचो ......... चर्चा करो [पृष्ठ ३७]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati [English] Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 2.04 शब्द संपदा
जरा सोचो ......... चर्चा करो | Q (१) | पृष्ठ ३७
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik [Marathi] Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 12 शब्द संपदा
अंतःपाठ प्रश्न | Q १०. | पृष्ठ ६६

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