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शब्दों की अंत्याक्षरी खेलोः जैसे - श्रृंखला ..... लालित्‍य ..... यकृत ..... तरुवर ..... रम्‍य .....। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

शब्दों की अंत्याक्षरी खेलोः

जैसे - श्रृंखला ..... लालित्‍य ..... यकृत ..... तरुवर ..... रम्‍य .....।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

कैलाश ... शताब्दी ... दीर्घायु ... युग्म ... मर्यादा ... दावत ... तरकीब ... बदनाम ... मशहूर ... रजनी।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 1.1: पुनरावर्तन - १ - अध्याय [पृष्ठ २६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 1.1 पुनरावर्तन - १
अध्याय | Q (१) | पृष्ठ २६
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 8.3 पुनरावर्तन - १
अंतःपाठ प्रश्न | Q १. | पृष्ठ ६१

संबंधित प्रश्न

मैंने समझा गाँव-शहर कविता से 


‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।


गाँव संबंधी सरकारी योजनाओं की जानकारी पढ़ो और मुख्य बातें सुनाओ।



।।श्रद्‌धा और विज्ञान, जीवन के दो पक्ष महान।।


 


मैंने समझा हम चलते सीना तान के कविता से 


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


यदि तुम्हें परी मिल जाए तो .....


यदि सच में हमारे मामा का घर चॉंद पर होता तो...


अपने परिवार के प्रिय व्यक्ति के लिए चार काव्य पंक्तियाँ लिखो।


यदि तुम्हें अलादीन का चिराग मिल जाए तो...


प्रत्येक का अपना-अपना महत्त्व होता है।


यदि भोजन से नमक गायब हो जाए तो...


पढ़ाई का नियोजन करते हुए अपनी दिनचर्या लिखो।


विलुप्त होते हुए प्राणियों तथा पक्षियों की जानकारी प्राप्त करके सूची बनाओ।


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

'किसी के क्षणिक आडम्बर और व्यवहार पर आँख मुँदकर विश्वास कर लेना घातक सिद्ध हो सकता है।-'सती' कहानी के प्रसंग में मदालसा के चरित्र को ध्यान में रखते हुए इस कथन की व्याख्या कीजिए।


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