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शब्दों की अंत्याक्षरी खेलोः जैसे - श्रृंखला ..... लालित्‍य ..... यकृत ..... तरुवर ..... रम्‍य .....।

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प्रश्न

शब्दों की अंत्याक्षरी खेलोः

जैसे - श्रृंखला ..... लालित्‍य ..... यकृत ..... तरुवर ..... रम्‍य .....।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

कैलाश ... शताब्दी ... दीर्घायु ... युग्म ... मर्यादा ... दावत ... तरकीब ... बदनाम ... मशहूर ... रजनी।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 1.1: पुनरावर्तन - १ - अध्याय [पृष्ठ २६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 1.1 पुनरावर्तन - १
अध्याय | Q (१) | पृष्ठ २६
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 8.3 पुनरावर्तन - १
पाठ्य प्रश्न | Q १. | पृष्ठ ६१

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कोई साप्ताहिक पत्रिका अनियमित रूप में प्राप्त होने के विरोध में शिकायत करते हुए संपादक को निम्‍न प्रारूप में पत्र लिखो :

पत्र का प्रारूप
(औपचारिक पत्र)

दिनांक :
प्रति,

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विषय : ______
संदर्भ : ______
महोदय,
विषय विवेचन

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भवदीय/भवदीया,

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नाम : ____________
पता : ____________
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ई-मेल आईडी : ____________


‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।


‘सड़क दुर्घटनाएँ : कारण एवं उपाय’ निबंध लिखो।



स्‍वामी विवेकानंद का कोई भाषण पढ़ो और प्रमुख वाक्‍य बताओ।


।। हम विज्ञान लोक के वासी ।।


मैंने समझा बेटी युग कविता से 


मैंने समझा दाे लघुकथाएँ पाठ से 


मैंने समझा रहस्य पाठ से 


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महान विभूतियों की सूची बनाकर उनके कार्यों का उल्लेख करते हुए निबंध लिखो।


यदि पानी की टोंटी बाेलने लगी........


अपने नाना जी/दादा जी को अपने मन की बात लिखकर भेजो।


नियत विषय पर भाषण तैयार करो।


हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए।


बढ़ता हुआ प्रदूषण और उसकी रोकथाम के लिए किए जाने वाले उपाय लिखिए ।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

अपने ग्राम/नगर/महानगर के संबंधित अधिकारी को बच्चों के खेलने के लिए बगीचा बनवाने हेतु पत्र लिखिए। (पत्र निम्‍न प्रारूप में हो)

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विषय विवेचन:

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भवदीय/भवदीया,
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