English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 6th Standard

।। जीवदया ही भूतदया है ।। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

Advertisements
Advertisements

Question

।। जीवदया ही भूतदया है ।।

Short/Brief Note
Advertisements

Solution

किसी दुखी व्यक्ति के प्रति सहानुभूति का भाव, जो उसे प्रेरणा दे, दया कहलाता है। संसार के छोटे-छोटे जीवों के प्रति भी दया का भाव रखना चाहिए। उनके प्रति दया ही संसार के सभी प्राणियों के प्रति सच्ची दया है।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 2.09: टीटू और चिंकी - टीटू और चिंकी [Page 48]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
Chapter 2.09 टीटू और चिंकी
टीटू और चिंकी | Q (३) | Page 48

RELATED QUESTIONS

पानी, वाणी, दूध इन शब्‍दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो।


मैंने समझा मेरा विद्रोह पाठ से 


मैंने समझा नहीं कुछ इससे बढ़कर कविता से 


पुण्यश्लोक अहिल्‍याबाई होळकर के कार्य पढ़ो और प्रमुख मुद्दे बताओ।


पाठाें में आए हुए मूल्यों को सुनो, तालिका बनाओ और सुनाओ।


यदि साइकिल तुमसे बोलने लगी तो ......


विद्‌यालय के स्नेह सम्मेलन का वर्णन करो।


पसंदीदा विषय पर विज्ञापन बनाकर उसको पढ़ो।


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×