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Question
‘भोजन का प्रभाव’- टिप्पणी लिखो।
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Solution
भारतीय परंपराओं के अनुसार भोजन सिर्फ हमारे शरीर की आवश्यकता नहीं है, अपितु इसका असर हमारे मन पर भी पड़ता है। इसी कारणवश भोजन को सात्विक, राजसिक व तामसिक भोजन ऐसी तीन श्रेणियों में बाँटा गया है। कहा जाता है, 'जैसा खाए अन्न, वैसा बने मन' अर्थात हम जैसा भोजन ग्रहण करते हैं, उसके अनुरूप हमारे तन व मन पर प्रभाव पड़ता है। जैसे यदि हम सात्विक भोजन करते हैं, तो हमारे मन में दया, क्षमा, प्रेम जैसे भाव अधिक होते हैं। राजसिक भोजन करने से आवेश, कामुकता, तनाव, आलस्य जैसे भाव व्यक्ति में बढ़ जाते हैं। इसके अलावा तामसिक भोजन करने वाले व्यक्तियों में क्रोध, हिंसा, उत्तजेना जैसे भाव बहुत अधिक होने की संभावना होती है। इस तरह यह कहा जा सकता है कि भोजन का हमारे शरीर व मन दोनों पर बहुत प्रभाव पड़ता है।
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निम्नलिखित शब्द की सहायता से नए शब्द बनाओ:

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निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:
नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।
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