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Question
।। हवा प्रकृति का उपहार, यही है जीवन का आधार ।।
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Solution
मानव जीवन के लिए जितना भोजन, वस्त्र और मकान आवश्यक है उतना ही जल और हवा भी। बिना खाए-पिए मानव कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, किंतु बिना हवा के मानव और प्राणी एक मिनट भी जीवित नहीं रह सकते। हवा के महत्त्व को देखते हुए हम यह कह सकते हैं कि हवा हमें प्रकृति से मिला वरदान है। वह हमारे जीवन का आधार है, क्योंकि उसके अभाव में जीवन जीना असंभव है।
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| गॉंव में मेला देखने वालों की भीड़ | → | सड़क पर प्रवेश द्वार के बीचोंबीच बड़ा-सा पत्थर | → | पत्थर से टकराकर छोटे-बड़ों का गिरना-पड़ना। | → | बहुत देर से लड़के का देखना |
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संदर्भ स्रोतों द्वारा निम्न रोगों से बचने के लिए दिए जाने वाले टीकों की जानकारी सुनो और संकलित करो :
| रोग | टीका | रोग | टीका |
| तपेदिक(टीबी) | बी.सी.जी | टायफॉइड (मोतीझरा) | ______ |
| डिप्थीरिया | ______ | रुबेला | ______ |
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| रोटावायरस | ______ | टिटनस | ______ |
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नवयुवकों की शक्ति देशहित में लगनी चाहिए।
अपनी कक्षा द्वारा की गई किसी क्षेत्रभेंट का वर्णन लिखिए।
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| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए:
एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - हंस का इनकार - कौए का घसीटकर ले जाना - कौए का चोंच नचा - नचाकर दही खाना - हंस का बिलकुल न खाना - आहट पाकर कौए का उड़ जाना - हंस का पकड़ा जाना - परिणाम - शीर्षक।
