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Question
पानी, वाणी, दूध इन शब्दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो।
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Solution
दीदी मेरी बड़ी सयानी,
बोले हरदम मीठी वाणी।
दूध-भात है उसको भाता,
लुका-छिपी में मजा है आता।
वर्षा ऋतु जब आती है,
पानी में उधम मचाती है।
पढ़ने-लिखने में बहुत है तेज,
बोले अंग्रेजी जैसे अंग्रेज।
मेरी दीदी है सबसे प्यारी,
मेरी तो दुनिया है सारी।
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| मी | भा | हो | भा | - | ______ | ||
| नी | से | ज | भि | र | - | ______ | |
| मं | बं | जू | स | ल | - | ______ | |
| स्क | रा | र्य | भा | चा | - | ______ | |
| जे. | क | म | ला | ए. | पी. | - | ______ |
| जा | अ | न | म्म | की | ल | - | ______ |
| ना | व | क | ला | चा | ल्प | - | ______ |
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
