English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 8th Standard

पानी, वाणी, दूध इन शब्‍दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

Advertisements
Advertisements

Question

पानी, वाणी, दूध इन शब्‍दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो।

Short/Brief Note
Advertisements

Solution

दीदी मेरी बड़ी सयानी,
बोले हरदम मीठी वाणी।
दूध-भात है उसको भाता,
लुका-छिपी में मजा है आता।
वर्षा ऋतु जब आती है,
पानी में उधम मचाती है।
पढ़ने-लिखने में बहुत है तेज,
बोले अंग्रेजी जैसे अंग्रेज।
मेरी दीदी है सबसे प्यारी,
मेरी तो दुनिया है सारी।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 1.9: अनमोल वाणी - कल्‍पना पल्‍लवन [Page 24]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
Chapter 1.9 अनमोल वाणी
कल्‍पना पल्‍लवन | Q 1 | Page 24

RELATED QUESTIONS

रचना के आधार पर विभिन्न प्रकार के तीन-तीन वाक्‍य पाठों से ढूँढ़कर लिखो।


‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।


मैंने समझा लकड़हारा और वन पाठ से 


 


तुम्हें रुपयों से भरा बटुआ मिल जाए तो .....


यदि तुम पशु-पक्षियों की बोलियाँ समझ पाते तो ..... 


यदि प्रकृति में सुंदर - सुंदर रंग नहीं होते तो ..........


ॠतुओं के नाम बताते हुए उनके परिवर्तन की जानकारी प्राप्त कराे और लिखो।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


यदि तुम्हें परी मिल जाए तो .....


यदि साइकिल तुमसे बोलने लगी तो ......


यदि पानी की टोंटी बाेलने लगी........


नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।


यदि खनिज तेल का खजाना समाप्त हो जाए तो...


।। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन। याेगासन है, उत्तम साधन ।।


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


अक्षर समूह में से वैज्ञानिकों के उचित नाम बताओ और लिखाे :

मी भा हो भा     - ______
नी से भि   - ______
मं बं जू   - ______
स्क रा र्य भा चा   - ______
जे. ला ए.  पी. - ______
जा म्म की - ______
ना ला चा ल्प - ______

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×