English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 6th Standard

वैज्ञानिक की जीवनी पढ़ो और उसके आविष्कार लिखो।

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Question

वैज्ञानिक की जीवनी पढ़ो और उसके आविष्कार लिखो।

Short/Brief Note
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Solution

डॉक्टर अबुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम भारत के महान वैज्ञानिक थे। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति का भी पदभार सँभाला। अब्दुल कलाम को लोग 'मिसाइल मैन' के भी नाम से जानते हैं। उन्होंने 'अग्नि' और 'पृथ्वी' जैसी मिसाइलों को स्वदेशी तकनीक से तैयार किया। उन्होंने पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.बी.तृतीय) प्रक्षेपास्त्र का निर्माण किया। कलाम ने भारत के लिए स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स) का सफलतापूर्वक डिजाइन भी बनाया। अब्दुल कलाम के आविष्कारों के जरिए भारत देश को और अधिक शक्तिशाली बनने में सहायता मिली।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 2.1: वह देश कौन-सा है? - वह देश कौन-सा है? [Page 52]

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Balbharati Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
Chapter 2.1 वह देश कौन-सा है?
वह देश कौन-सा है? | Q (७) | Page 52

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किसी गायक/गायिका की सचित्र जानकारी लिखो।


शब्दों की अंत्याक्षरी खेलोः

जैसे - श्रृंखला ..... लालित्‍य ..... यकृत ..... तरुवर ..... रम्‍य .....।


यदि तुम सैनिक होते तो .....


निम्नलिखित शब्दों में कौन-से पंचमाक्षर छिपे हुए हैं, साेचो और लिखो:

शब्द पंचमाक्षर उसी वर्ग के अन्य शब्द
पंकज ______ ______
चंचल ______ ______
ठंडा ______ ______
संत ______ ______
पेरांबूर ______ ______
पंछी ______ ______
बंदरगाह ______ ______
उमंग ______ ______

।। ईमानदारी चरित्र निर्माण की नींव है ।।


महान विभूतियों की सूची बनाकर उनके कार्यों का उल्लेख करते हुए निबंध लिखो।


।। जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।


यदि तुम्हें अलादीन का चिराग मिल जाए तो...


अपने साथ घटित कोई मजेदार घटना बताओ।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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