Advertisements
Advertisements
Question
।। जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।
Advertisements
Solution
हमारी जननी-जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं। मनुष्य को जन्म देने वाली उसकी माँ और जिस भूमि में व्यक्ति का जन्म हुआ है, उसका सदा मान रखना चाहिए। उसके समक्ष स्वर्ग के सारे सुख भी ना के बराबर होते हैं। हमें अपनी जननी-जन्मभूमि के प्रति सदा कृतज्ञ रहना चाहिए।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
किसी गायक/गायिका की सचित्र जानकारी लिखो।
संदर्भ स्रोतों द्वारा निम्न रोगों से बचने के लिए दिए जाने वाले टीकों की जानकारी सुनो और संकलित करो :
| रोग | टीका | रोग | टीका |
| तपेदिक(टीबी) | बी.सी.जी | टायफॉइड (मोतीझरा) | ______ |
| डिप्थीरिया | ______ | रुबेला | ______ |
| खसरा | ______ | हैपेटाइटिस ए | ______ |
| रोटावायरस | ______ | टिटनस | ______ |

यदि प्रकृति में सुंदर - सुंदर रंग नहीं होते तो ..........
चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________
बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?
मॉं को एक दिन की छुट्टी दी जाए तो क्या होगा ?
रुपयों (नोट) पर लिखी कीमत कितनी और किन भाषाओं में अंकित है, बताओ।

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
‘मैं पंछी बोल रहा हूँ ...’ विषय पर निबंध लिखिए।
