Advertisements
Advertisements
Question
मैंने समझा सौहार्द कविता से
Advertisements
Solution
भारत में धर्म, जाति, संस्कृति आदि की विविधता पाई जाती है। इसके बावजूद भी सभी भारतीयों में एकता की भावना अधिक बलवती है। विविधता में एकता यह हमारी पहचान है। हमें अपनी इस पहचान को बनाए रखते हुए प्रेम, सहयोग व सद्भावना से आपस में मिलजुलकर रहना चाहिए।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
मैंने समझा खेती से आई तब्दीलियाँ पाठ से
निम्न मुद्दों के आधार पर विज्ञापन लिखो :
स्थल/जगह, संपर्क, पुस्तक मेला, दिनांक, समय
‘गाँव का विकास, देश का विकास’ इस विषय पर संवाद सुनो और सुनाओ।

पूरी वर्णमाला क्रम से पढ़ो:
क्ष श य प त ट च क ए अ ञ ष र फ
थ ठ छ ख ऐ आ ज्ञ स ल ब घ ढ़ ई ॠ
द ड ज ग ओ इ श्र ह व भ ध ढ झ ऑ
ळ म न ण त्र ङ अं उ ड़ अः ऊ अँ औ

अपने चित्र के बारे में बोलो।

किसी परिचित अन्य कहानी लेखन के लिए मुद्दे तैयार करो।
दिए गए चित्रों के आधार पर उचित और आकर्षक विज्ञापन तैयार करो।

यदि पानी की टोंटी बाेलने लगी........
नियत विषय पर भाषण तैयार करो।
प्रत्येक का अपना-अपना महत्त्व होता है।
खादी का कपड़ा कैसे बनाया जाता है इसकी जानकारी प्राप्त करके लिखो।
अपने मित्र को शुभकामना/बधाई पत्र लिखो।
‘बाघ बचाओ परियोजना’ के बारे में जानकारी प्राप्त कर लिखो।
मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:

एक महीने की दिनदर्शिका बनाओ और विशेष दिन बताओ।
निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
आसमान में उड़ती पतंगें। देश को आजाद हुए 75 वर्ष हो गए। एक लंबा समय और हम अभी भी .........
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
