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Question
बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।
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Solution
बिस्मिल्ला खाँ भारत के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक थे। इसके लिए उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया है। 90 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने शहनाई बजाना नहीं छोड़ा। उन्होंने जीवनभर संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने अंदर जिंदा रखा। उनमें संगीत सीखने की इच्छा कभी खत्म नहीं हुई। खुदा के सामने वे गिड़गिड़ाकर कहते - “मेरे मालिक एक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।” खाँ साहब ने कभी भी धन-दौलत को पाने की इच्छा नहीं की, बल्कि उन्होंने संगीत को ही सर्वश्रेष्ठ माना। वे कहते थे - “मालिक से यही दुआ है - फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।”
इससे यह पता चलता है कि बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे।
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आशय स्पष्ट कीजिए -
‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।’
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