Advertisements
Advertisements
Question
आशय स्पष्ट कीजिए -
‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।’
Advertisements
Solution
यहाँ उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ ने सुर की तुलना कपड़े से करते हुए सुर को अधिक महत्वपूर्ण बताया है। उनका मानना है कि यदि कपड़ा फट जाए तो उसे सिलकर दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, लेकिन एक बार बिगड़ा हुआ सुर फिर पहले जैसा नहीं बन पाता। इसलिए वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि चाहे उन्हें धन-संपत्ति या अच्छे वस्त्र न मिलें, परंतु उनका सुर हमेशा मधुर और शुद्ध बना रहे।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
बिस्मिल्ला खाँ को लेखक 'मंगल ध्वनि का नायक' क्यों कहता है?
सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है?
काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?
पाठ में आए किन प्रसंगों के आधर पर आप कह सकते हैं कि -
बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?
इतिहास में शहनाई का उल्लेख किस तरह मिलता है?
बिस्मिल्ला खाँ अपने खुदा से सजदे में क्या माँगते हैं? इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है?
बिस्मिल्ला खाँ की तुलना कस्तूरी मृग से क्यों की गई है?
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ काशी विश्वनाथ जी के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं, स्पष्ट कीजिए।
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ काशी छोड़कर अन्यत्र क्यों नहीं जाना चाहते हैं?
मंगलध्वनि किसे कहते हैं?
शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी क्यों हैं?
भारत रत्न बिस्मिल्ला खाँ पर 'सादा जीवन उच्च विचार' वाली कहावत चरितार्थ होती है, कैसे?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
'मंगलध्वनि' का क्या अभिप्राय है?
'भारत रत्न' जैसे पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का कारण बिस्मिल्ला खाँ की दृष्टि में था -
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
बिस्मिल्ला खाँ 'मालिक' से कौन-सी दुआ माँगते थे? इससे उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पहलू सामने उभरता है?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
काशी में किस प्रकार के परिवर्तन हो रहे थे और उन परिवर्तनों पर बिस्मिल्ला खाँ क्या सोचते थे?
