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Question
आशय स्पष्ट कीजिए -
‘मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।’
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Solution
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पाँचों समय की नमाज़ अदा करने के बाद ईश्वर से सच्चे और शुद्ध सुर का वरदान माँगते थे। वे प्रार्थना करते थे कि उनके संगीत में इतनी प्रभावशाली शक्ति हो कि उसे सुनकर लोगों के हृदय भाव-विभोर हो जाएँ और उनकी आँखों से मोतियों जैसे आँसू बहने लगें। उनके अनुसार, शहनाई के सुरों की यही सबसे बड़ी सफलता और उपलब्धि थी।
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