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प्रश्न
आशय स्पष्ट कीजिए -
‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।’
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उत्तर
यहाँ उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ ने सुर की तुलना कपड़े से करते हुए सुर को अधिक महत्वपूर्ण बताया है। उनका मानना है कि यदि कपड़ा फट जाए तो उसे सिलकर दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, लेकिन एक बार बिगड़ा हुआ सुर फिर पहले जैसा नहीं बन पाता। इसलिए वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि चाहे उन्हें धन-संपत्ति या अच्छे वस्त्र न मिलें, परंतु उनका सुर हमेशा मधुर और शुद्ध बना रहे।
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