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Question
AD एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC का एक शीर्षलम्ब है, जिसमें AB = AC है। दर्शाइए कि:
- AD रेखाखंड BC को समद्विभाजित करता है।
- AD कोण A को समद्विभाजित करता है।
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Solution

(i) ∆ABD और ∆ACD में,
AB = AC ...[दिया गया है]
∠ADB = ∠ADC ...[प्रत्येक 90°]
AD = AD ...[उभयनिष्ठ]
∴ ∆ABD ≅ ∆ACD ...[RHS सर्वांगसमता नियम से]
अतः, BD = DC ...[सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग]
⇒ D, BC का मध्य-बिंदु है
या AD, BC को समद्विभाजित करता है।
(ii) चूँकि, ∆ABD ≅ ∆ACD,
∠BAD = ∠CAD ...[सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग]
⇒ इस प्रकार, AD, ∠A को समद्विभाजित करता है।
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एक समकोण त्रिभुज ABC में, जिसमें कोण C समकोण है, M कर्ण AB का मध्य-बिंदु है। C को M से मिलाकर D तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि DM = CM है। बिंदु D को बिंदु B से मिला दिया जाता है (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि:
- △AMC ≌ △BMD
- ∠DBC एक समकोण है।
- △DBC ≌ △ACB
- CM = `1/2` AB

“यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाएँ और एक कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और एक कोण के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज अवश्य ही सर्वांगसम होने चाहिए।” क्या यह कथन सत्य है? क्यों?
AB = AC वाले एक समद्विबाहु त्रिभुज के कोणों B और C के समद्विभाजक परस्पर O पर प्रतिच्छेद करते हैं। BO को एक बिंदु M तक बढ़ाया जाता है। सिद्ध कीजिए कि ∠MOC = ∠ABC है।
एक समबाहु त्रिभुज के सभी कोण ज्ञात कीजिए।
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∆ABD और ∆ACD में,
AB = AC (दिया है)
∠B = ∠C (क्योंकि AB = AC)
तथा ∠ADB = ∠ADC (प्रत्येक 90°)
अतः, ∆ABD ≅ ∆ACD (AAS)
इसलिए, ∠BAD = ∠CAD (CPCT)
उपरोक्त तर्कणों में क्या कमी है?
[संकेत : याद कीजिए कि जब AB = AC हो, तो ∠B = ∠C को कैसे सिद्ध किया जाता है।]
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सिद्ध कीजिए कि एक त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा की संगत माध्यिका के दोगुने से बड़ा होता हैं।
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सिद्ध कीजिए कि एक समबाहु त्रिभुज को छोड़कर, किसी त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा का सम्मुख कोण एक समकोण के `2/3` भाग से बड़ा होता हैं।
