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गीतावली से संकलित पद 'राघौ एक बार फिरि आवौ' मैं निहित करुणा और संदेश को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

गीतावली से संकलित पद 'राघौ एक बार फिरि आवौ' मैं निहित करुणा और संदेश को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

प्रस्तुत पंक्ति में माता कौशल्या का दुख और पुत्र वियोग दुष्टिगोचर होता है। माता कौशल्या राम के वन में जाने से बहुत दुखी हैं। वे अपने पुत्र राम को वापस आने का निवेदन करती हैं। कौशल्या का यह निवेदन अपने लिए नहीं है बल्कि राम के घोड़े के लिए है। राम का घोड़ा उनके जाने से बहुत दुखी है। वह भरत की देखभाल के बाद भी कमज़ोर होता जा रहा है। कौशल्या माता से उसका दुख नहीं देखा जाता है। वे घोड़े का विरह भली-प्रकार से समझ पा रही हैं। दोनों ही राम को बहुत प्रेम करते हैं। अत: उनका हृदय रो पड़ता है और वे यह कहने के लिए विवश हो जाती हैं कि राम तुम एक बार लौट कर आ जाओ, मेरे लिए नहीं अपने प्रिय घोड़े के लिए आ जाओ।

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पाठ 1.06: तुलसीदास (भरत-राम का प्रेम, पद) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ४५]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 Class 12
पाठ 1.06 तुलसीदास (भरत-राम का प्रेम, पद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ ४५

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द्रोपदी री लाज राखीआप बढ़ायो चीर।
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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
बूढ़तो गजराज राख्योकाटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधरहरो म्हारी भीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
चाकरी में दरसण पास्यूँसुमरण पास्यूँ खरची।
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उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप लिखिए-
उदाहरण − भीर − पीड़ा/कष्ट/दुखरी − की

  1. चीर –  __________
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  8. राखो – __________
  9. घणा – __________
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