Advertisements
Advertisements
प्रश्न
पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
'सूर के पद' में गोपियों के माध्यम से सूरदास की भक्ति-भावना सामने आती है। इस कथन के आलोक में सूरदास की भक्ति-भावना पर टिप्पणी कीजिए। (किन्हीं दों बिन्दुओं को उत्तर में अवश्य शामिल करें)
Advertisements
उत्तर
'सूर के पद' में गोपियों के माध्यम से सूरदास की भक्ति-भावना सामने आती है जो इस प्रकार है -
- वे स्वयं को कृष्ण रूपी गुड़ पर लिपटी हुई चींटी कहती हैं।
- वे स्वयं को हारिल पक्षी के समान कहती हैं जिसने कृष्ण-प्रेम रूपी लकड़ी को दृढ़ता से थामा हुआ है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?
उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?
प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।
गोपियों ने यह क्यों कहा कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं? क्या आपको गोपियों के इस कथन का विस्तार समकालीन राजनीति में नज़र आता है, स्पष्ट कीजिए।
गोपियों ने अपने लिए कृष्ण को हारिल की लकड़ी के समान क्यों बताया है?
‘कमल के पत्ते’ और ‘तेल लगी गागर’ की क्या विशेषता होती है?
‘प्रीति नदी में पाउँ न बोयो’ का आशय स्पष्ट कीजिए। ऐसा किसके लिए कहा गया है?
गोपियों को मदद मिलने की आशा कहाँ लगी थी, पर उनकी यह आशा निराशा में कैसे बदल गई?
उद्धव गोपियों के पाए जिस उद्देश्य से आए थे, उसमें सफल नहीं हो सके?
गोपियों ने कृष्ण को राजधर्म की बात क्यों याद दिलाई?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रुप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
पहले हमारे यहाँ दस अवतार माने जाते थे। विष्णु के अवतार राम और कृष्ण प्रमुख हैं। अन्य अवतारों के बारे में जानकारी प्राप्त करके एक चार्ट बनाइए।
श्रीकृष्ण ने गजराज की मदद किस तरह की थी ?
पाठ में संकलित पदों के आधार पर मीरा की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए।
‘सेह पिरित अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए’ से लेखक का क्या आशय है?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
कुसुमित कानन हेरि कमलमुखि, मूदि रहए दु नयान।
कोकिल-कलरव, मधुकर-धुनि सुनि, कर देइ झाँपइ कान।।
पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
'सूर के पद' में प्रेम की मर्यादा का निर्वाह किसने और किस प्रकार नहीं किया?
गोपियाँ कृष्ण को हारिल की लकड़ी के समान पकड़े हैं - इसका आशय है -
