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प्रश्न
‘प्रीति नदी में पाउँ न बोयो’ का आशय स्पष्ट कीजिए। ऐसा किसके लिए कहा गया है?
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उत्तर
‘प्रीति नदी में पाउँ न बोयो’ का आशय है कि-प्रेम रूपी नदी में पैर न डुबोना। अर्थात् किसी से प्रेम न करना और प्रेम का महत्त्व न समझना। ऐसा उन उद्धव के लिए कहा गया है, जो कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते बने रहे।
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