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गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

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प्रश्न

गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

दीर्घउत्तर
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उत्तर

गोपियाँ उद्धव को भाग्यवान कहते हुए व्यंग्य कसती है कि श्री कृष्ण के सानिध्य में रहते हुए भी वे श्री कृष्ण के प्रेम से सर्वथा मुक्त रहे। वे कैसे श्री कृष्ण के स्नेह व प्रेम के बंधन में अभी तक नहीं बंधे?, श्री कृष्ण के प्रति कैसे उनके हृदय में अनुराग उत्पन्न नहीं हुआ? अर्थात् श्री कृष्ण के साथ कोई व्यक्ति एक क्षण भी व्यतीत कर ले तो वह कृष्णमय हो जाता है। परन्तु ये उद्धव तो उनसे तनिक भी प्रभावित नहीं है प्रेम में डूबना तो अलग बात है।

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पद
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पाठ 1: सूरदास - पद - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ७]

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 Class 10
पाठ 1 सूरदास - पद
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ७

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