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प्रश्न
उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए।
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उत्तर
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"कबहुँ समुझि वनगमन राम को रही चकि चित्रलिखी सी।"– इस पंक्ति में 'चित्रलिखी सी' में उपमा अलंकार है। इसमें माता कौशल्या की दशा का वर्णन चित्र रूप में उकेरी गई स्त्री से किया गया है। जैसे- चित्र में बनी स्त्री हिलती-डुलती नहीं है, वैसे ही माता कौशल्या राम को अपने पास न पाकर चित्र के समान स्तब्ध और चकित खड़ी रह जाती है।
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'तुलसीदास वह समय कहे तें लागति प्रीति सिखी सी।'– इस पंक्ति में 'सीखी सी' में उपमा अलंकार है। इसमें माता कौशल्या की दशा मोरनी के समान दिखाई गयी है। जो वर्षा के समय प्रसन्न होकर नाचती है परन्तु जब उसकी दुष्टि अपने पैरों पर जाती है, तो वह रो पड़ती है।
संबंधित प्रश्न
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मधुबन की छाती को देखो।
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मेरी भव-बाधा हरौ राधा नागरि सोई।
जा तन की झाईं परै, स्यामु हरित दुति होई।।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
कहै कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराई लीनी।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
तीन बेर खाती थीं वे तीन बेर खाती हैं।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
सुख चपला-सा, दुख घन में
उलझा है चंचल मन कुरंग।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मानो घर-घर न हो, जैसे कोई चिड़ियाघर हो।
जिसमें खूँखार जानवर आबाद हों।
अलंकार बताइए:
बड़े-बड़े पियराए पत्ते
अलंकार बताइए:
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो
अलंकार बताइए:
खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई
अलंकार बताइए:
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल
उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग कहाँ और क्यों किया गया है? उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।
कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को।
निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।
कूक भरी मूकता बुलाए आप बोलि है।
निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।
अब न घिरत घन आनंद निदान को।
कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।
चरण सरोज पखारन लागा।
निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:
हनुमंत की पूँछ में लग न पाई आग।
लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग ।।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।
करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।
"एक दिवस सूरज ने सोची, छुट्टी ले लेने की बात।
सोचा कुछ पल सुकूँ मिलेगा, चलने दो धरती पर रात।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
पड़ी अचानक नदी अपार।
घोड़ा उतरे कैसे पार ॥
राणा ने सोचा इस पार।
तब तक चेतक था उस पार ॥
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
ऊँची-नीची सड़क, बुढ़िया के कूबड़-सी।
नंदनवन-सी फूल उठी, छोटी-सी कुटिया मेरी।
निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:
सिंधु - सेज पर धरा - वधू।
अब तनिक संकुचित बैठी - सी॥
निम्नलिखित उदाहरण के रस पहचानकर लिखिए।
कहूँ सुलगत कोउ चिता कहूँ कोड जात लगाई।
एक लगाई जात एक की राख बुझाई।
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उप-प्रकार |
| कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। जो खाए बौराय जग, जो पाए बौराय। |
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -
“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”
इस दोहे में निहित अलंकार है -
'जो रहीम गति दीप की कुल कपूत की सोय।
बारै उजियारों करै, बढ़ै अँधेरो होय।'
इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -
'उषा सुनहले तीर बरसती
जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
निम्नलिखित में अलंकार है - 'मेघ आए बन-ठन के सँवर के।'
“प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।” इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है -
'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है -
निम्नलिखित में उत्प्रेक्षा अलंकार है -
'आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।'
- प्रस्तुत पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
निम्नलिखित में से किन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है?
स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए -
| स्तम्भ-I | स्तम्भ-II | ||
| (I) | हेमकुंभ ले उषा सवेरे भरती ढुलकाती सुख मेरे। | (अ) | श्लेष अलंकार |
| (II) | हरिमुख मानो मधुर मयंक। | (ब) | उत्प्रेक्षा अलंकार |
| (III) | पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून। | (स) | मानवीकरण अलंकार |
‘माली आवत देख कर कलियाँ करैं पुकार’ - प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है -
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
उधो, मेरा हृदयतल था एक उद्यान न्यारा।
शोभा देतीं अमित उसमें कल्पना-क्यारियाँ भी।।
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनों नीलमनि शैल पर, आतप पर्यो प्रभात।।
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उप-प्रकार |
| जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोई। बारे उजियारो करे, बढ़े अँधेरो होई। |
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