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नायिका के प्राण तृप्त न हो पाने के कारण अपने शब्दों में लिखिए।

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प्रश्न

नायिका के प्राण तृप्त न हो पाने के कारण अपने शब्दों में लिखिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

नायिका अपने प्रेमी से अतुलनीय प्रेम करती है। वह जितना इस प्रेम रूपी सागर में डूबती जाती है, उतना अपने प्रेमी की दीवानी होती जाती है। वह अपने प्रियतम के रूप को निहारते रहना चाहती है। वह जितना उसे देखती है, उसकी तृप्ति शांत होने के स्थान पर बढ़ती चली जाती है। इसका कारण वह प्रेम को मानती है। उसके अनुसार उसका प्रेम जितना पुराना हो रहा है, उसमें नवीनता का समावेश उतना ही अधिक हो रहा है। दोनों में प्रेम के प्रति प्रथम दिवस जैसा ही आकर्षण है। अतः उसे तृप्ति का अनुभव ही नहीं होता है। उसके अनुसार प्रेम ऐसा भाव है, जिसके विषय में वर्णन कर पाना संभव नहीं है। इस संसार में कोई भी प्रेम को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में समर्थ नहीं है। प्रेमी का साथ उसे कुछ समय के लिए सांत्वना तो देता है परन्तु तृप्ति का भाव नहीं देता। उसके प्राण अतृप्त से प्रेमी के आस-पास ही रहना चाहते हैं।

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पद
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पाठ 1.09: विद्यापति - पद - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ५०]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 Class 12
पाठ 1.09 विद्यापति - पद
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ ५०

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