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‘सेह पिरित अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए’ से लेखक का क्या आशय है?

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प्रश्न

‘सेह पिरित अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए’ से लेखक का क्या आशय है?

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

प्रस्तुत पंक्तियाँ प्रेम के विषय में वर्णन कर रही हैं। इसके अनुसार प्रेम ऐसा भाव है, जिसके विषय में कुछ कहना या व्यक्त करना संभव नहीं है। प्रेम में पड़ा हुआ व्यक्ति इस प्रकार दीवाना हो जाता है कि वह जितना स्वयं को निकालना चाहता है, उतना ही डूबता चला जाता है। यह पुराना होने पर भी नए के समान लगता है क्योंकि प्रेमियों का एक दूसरे के प्रति आकर्षण तथा प्रेम प्रागढ़ होता जाता है। कवि के अनुसार प्रेम कोई स्थिर चीज़ नहीं है, जिसमें कोई परिवर्तन न हो। स्थिर वस्तु का बखान करना सरल है परन्तु यह ऐसा भाव है, जो समय के साथ-साथ पल-पल बदलता रहता है। यही कारण है कि इसका वर्णन करना कठिन हो जाता है और इसमें नवीनता बनी रहती है।

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पद
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अध्याय 1.09: विद्यापति - पद - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ५०]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 Class 12
अध्याय 1.09 विद्यापति - पद
प्रश्न-अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ५०

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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रुप नरहरि, धर्यो आप सरीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
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उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप लिखिए-
उदाहरण − भीर − पीड़ा/कष्ट/दुख; री − की

  1. चीर –  __________
  2. बूढ़ता – __________
  3. लगास्यूँ – __________
  4. धर्यो – __________
  5. कुण्जर – __________
  6. बिन्दावन – __________
  7. रहस्यूँ – __________
  8. राखो – __________
  9. घणा – __________
  10. सरसी – __________
  11. हिवड़ा – __________
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पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:

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