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गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए।

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प्रश्न

गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं। हम भी निम्नलिखित तर्क दे सकते हैं:

  • कृष्ण की प्रवृत्ति भौंरे के समान है। एक जगह टिककर नहीं रह सकते। प्रेमरस पाने के लिए अलग-अलग डाली पर भटकते रहते हैं।
  • उद्धव पर कृष्ण का प्रभाव तो पड़ा नहीं, परंतु लगता है कि कृष्ण पर उद्धव की योग-साधना का प्रभाव अवश्य पड़ गया है।
  • निर्गुण अर्थात् जिस ब्रह्म के पास गुण नहीं हैं, उसकी उपासना हम नहीं कर सकते हैं।
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पद
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अध्याय 1: सूरदास - पद - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ७]

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 Class 10
अध्याय 1 सूरदास - पद
प्रश्न-अभ्यास | Q 13. | पृष्ठ ७

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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखीआप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रुप नरहरिधर्यो आप सरीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
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उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप लिखिए-
उदाहरण − भीर − पीड़ा/कष्ट/दुखरी − की

  1. चीर –  __________
  2. बूढ़ता – __________
  3. लगास्यूँ – __________
  4. धर्यो – __________
  5. कुण्जर – __________
  6. बिन्दावन – __________
  7. रहस्यूँ – __________
  8. राखो – __________
  9. घणा – __________
  10. सरसी – __________
  11. हिवड़ा – __________
  12. कुसुम्बी – __________

मीरा के पदों का संकलन करके उन पदों को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।


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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।

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