Advertisements
Advertisements
प्रश्न
आत्मकथात्मक निबंध: मैं हूँ भाषा
Advertisements
उत्तर
मैं हूँ भाषा
मैं भूत को वर्तमान से और वर्तमान को भविष्य से जोड़ने का प्रभावशाली माध्यम हूँ। सदियों से सदियों तक, अलग-अलग रूप बदलकर चलने वाली मैं 'भाषा' हूँ। तुम अपने विचार दूसरों तक पहुँचाने के लिए मेरा ही उपयोग करते हो। दूसरों के विचारों और भावनाओं को समझने में भी मैं ही सहायक होती हूँ। समय गुजरता है, युग बदलते हैं, पीढ़ियाँ बढ़ती हैं, लेकिन बीते समय, युग और पीढ़ियों को आज के समय, युग और पीढ़ियों से जोड़ने वाली मैं एक अटूट पुल हूँ।
संकेतों में जन्म लेकर, चित्रों और प्रतीकों से विकसित होते हुए, आज मैं लिपियों में बँधी आपके सामने हूँ। मंत्र-तंत्र से होते हुए यंत्र युग तक अपनी छाप छोड़ने वाली, मैं आपकी अपनी प्रिय 'भाषा' हूँ। मेरा यह स्वरूप मेरे पूर्वजों की देन है। आज के आधुनिक युग में, भारत में मैं हिंदी हूँ, लंदन में अंग्रेजी, चीन में चीनी, जापान में जापानी, रूस में रूसी, जर्मनी में जर्मन, और फ्रांस में फ्रेंच। आदिम जंगलों से सुसभ्य समाज तक पहुँचने में मेरे परिवार को लाखों साल लग गए। मेरी खोज सबसे बुद्धिमान माने जाने वाले मनुष्य ने अपनी जीवन शैली को सरल, मधुर और सुविधाजनक बनाने के लिए की थी। हर युग, देश और वातावरण में मेरे गलत उपयोग भी हुए हैं, लेकिन मेरा सौभाग्य है कि मेरी उपयोगिता शाश्वत है। वैदिक संस्कृत से लेकर लौकिक संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश और खड़ी बोली हिंदी तक, ये सभी मेरे ही रूप हैं।
आधुनिक युग, यानी विज्ञान और प्रौद्योगिकी के युग में होने के बावजूद, आप मेरी सहायता के बिना आदियुग, अश्म-युग, अग्नि-युग और धातु-युग जैसी यात्राओं का अनुभव, आनंद और ज्ञान नहीं पा सकते। युद्ध, संधि, क्रांति, भ्रांति, प्रेम, पंथ, जाति, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, ये सभी मेरे द्वारा ही संभव होते हैं। व्याकरण शास्त्रियों और साहित्यकारों से मेरा जन्म-जन्मांतर का गहरा संबंध है। उन्होंने समय-समय पर मुझमें मौजूद दोषों को दूर करने का प्रयास किया है, और इन्हीं अथक प्रयासों की वजह से मेरा स्वरूप और भी निखरता गया है। रस, छंद, अलंकार, शिल्प और सौंदर्य से भरपूर होकर, मैं गुणवान और मूल्यवान बनती चली गई।
अपना गौरवशाली ऐतिहासिक महत्त्व बनाए रखते हुए, मैं आज के अत्याधुनिक युग में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन सरलता और नि:स्वार्थ भाव से कर रही हूँ। करोड़ों वर्षों से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद मुझमें ज़रा भी अहंकार नहीं है। शायद इसी वजह से, मेरी आवश्यकता और महत्त्व करोड़ों वर्षों बाद भी बरकरार है। मेरा महत्त्व आपको इसी बात से समझ आ जाएगा कि "मैं हूँ भाषा" लिखने के लिए भी आपको मेरी ही जरूरत पड़ रही है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
मेरा देश भारत विषय पर 200 शब्दों का निबंध लिखिए।
किसी पालतू प्राणी की आत्मकथा लिखिए।
‘यदि मेरा घर अंतरिक्ष में होता,’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लेखन कीजिए।
‘विश्वबंधुता वर्तमान युग की माँग’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
‘मेरा प्रिय वैज्ञानिक’ विषय पर निबंध लेखन कीजिए।
कल्पनाप्रधान निबंध: यदि श्यामपट बोलने लगा......
कल्पनाप्रधान निबंध: यदि किताबें न होतीं
चरित्रात्मक निबंध: मेरा प्रिय रचनाकार
‘मैं प्रकृति बोल रही हूँ’ विषय पर निबंध लेखन कीजिए।
‘मोबाइल के अति उपयोग से होने वाले दुष्परिणाम’ विषय पर अपने विचार लिखिए।
‘स्वार्थ के अंधेपन से व्यक्ति अपनों से दूर हो जाता है’ इस संदर्भ में अपने विचार लिखिए।
‘देश की उन्नति में युवाओं का योगदान’ विषय पर अपने विचारों की मौखिक तथा लिखित अभिव्यक्ति कीजिए।
‘संगणक की आत्मकथा’ इस विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
‘जल है तो कल है’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
‘युवापीढ़ी का उत्तरदायित्व’ विषय पर लगभग सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
निम्नलिखित विषय पर लगभग ८० से १०० शब्दों में निबंध लिखिए:
मेरा भारत देश
निम्नलिखित विषय पर लगभग ८० से १०० शब्दों में निबंध लिखिए:
पर्यावरण संतुलन
निम्नलिखित विषय पर 200 शब्दों में रचनात्मक लेखन लिखिए:
दुर्घटना से देर भली
निम्नलिखित विषय पर 60-70 शब्दों में निबंध लिखिए:
मेरा प्रिय नेता
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
नदी की आत्मकथा
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
यदि मैं अध्यापक होता .....
निम्नलिखित विषय पर 60 से 70 शब्दों में निबंध लिखिए:
मैं पेड़ बोल रहा हूँ ...
निम्नलिखित विषय पर लगभग 70 से 80 शब्दों में निबंध लिखिए:
समय का सदुपयोग
निम्नलिखित विषय पर लगभग 70 से 80 शब्दों में निबंध लिखिए:
मैं पृथ्वी बोल रही हूँ...
निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
मैं सड़क बोल रही हूँ......
निबंध लेखन -
कोरोना काल में दूरदर्शन की भूमिका
निम्नलिखित दिए गए शीर्षक पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
गरमी की पहली बारिश
निबंध लिखिए:
घायल सैनिक की आत्मकथा
निम्नलिखित दिए गए शीर्षक पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
मैच खेलने का अवसर
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
दिया और तूफ़ान : मानव जीवन का सत्य
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
झरोखे से बाहर
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
आज़ादी का अमृत महोत्सव: स्वर्णिम 75 साल
निबंध लिखिए -
भ्रष्टाचार
आतंकवाद
निबंध लिखिए:
वृक्षारोपण
निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
"अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत"
निबंध लिखिए:
तनाव
निबंध लिखिए:
सफलता
निबंध लिखिए-
आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।
निबंध लिखिए -
यदि मैं प्रधानमंत्री होता।
निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।
ऑनलाइन या ई-लर्निंग और विद्यार्थी
निम्नलिखित विषय पर लगभग (80-100) शब्दों में निबंध लिखिए।
स्वच्छता
निम्नलिखित विषय पर लगभग 80-100 शब्दों में निबंध लिखिए।
समय बड़ा बलवान
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।
एक किसान की आत्मकथा
निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
फटी पुस्तक की आत्मकथा
निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
पर्यावरण सुरक्षा में पक्षियों की भूमिका
राष्ट्र का गौरव बनाए रखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा किए सराहनीय कार्यों की सूची बनाइए।
‘प्रदूषण मुक्त त्योहार’ इस विषय पर निबंध लिखिए।
दैनंदिनी (डायरी) तुमच्याशी बोलत आहे, अशी कल्पना करून तिचे आत्मकथन पुढील मुद्द्यांचा उपयोग करून लिहा.
- निर्मिती
- महत्त्व
- उपयोग
- इतरांची भावना
- आनंद
- खंत
‘करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’ इस विषय पर भाषाई सौंदर्यवाले वाक्यों, सुवचन, दोहे आदि का उपयोग करके निबंध/कहानी लिखिए ।
रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखित ‘गेंहूँ बनाम गुलाब’ निबंध पढ़िए और उसका आकलन कीजिए ।
‘यदि मैं शिक्षा मंत्री होता -----’ विषय पर लगभग सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
सैनिक की आत्मकथा
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
यदि पुस्तकें न होती........
