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Question
'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है -
Options
प्रभु की सत्ता पर संदेह न करना।
प्रत्येक जीव में परमात्मा को देखना।
ईश्वर के दर्शनों की अभिलाषा रखना।
सत्मार्ग पर चलकर जीवन यापन करना।
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Solution
प्रभु की सत्ता पर संदेह न करना।
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कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।
निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर वंचना रही
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