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रवींद्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता (कोलकाता) के निकट एक शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी। पुस्तकालय की मदद से उसके विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए। - Hindi Course - B

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Question

रवींद्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता (कोलकाता) के निकट एक शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी। पुस्तकालय की मदद से उसके विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।

Activity
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Solution

रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थान: शांतिनिकेतन

स्थापना: 

  1. स्थान: शांतिनिकेतन, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल (कोलकाता के निकट)।
  2. वर्ष: 1901 में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इस शिक्षण संस्थान की स्थापना की।
  3. प्रारंभिक उद्देश्य:
    • पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से हटकर एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना, जिसमें छात्रों को प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हुए शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले।
    • भारतीय संस्कृति, कला, और साहित्य को बढ़ावा देना।

विकास और स्वरूप:

  • 1921 में, इस संस्थान को "विश्वभारती विश्वविद्यालय" में परिवर्तित किया गया।
  • शांतिनिकेतन का मुख्य उद्देश्य भारतीय और पश्चिमी संस्कृति का समन्वय करना था।
  • यहाँ की शिक्षा प्रणाली में साहित्य, संगीत, नृत्य, कला और हस्तकला को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।
  • शिक्षा प्रकृति के समीप, खुले वातावरण में दी जाती थी, जिससे छात्र स्वच्छंद और रचनात्मक तरीके से सीख सकें।

महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ:

  1. गुरुकुल पद्धति: छात्रों और शिक्षकों के बीच घनिष्ठ संबंध और खुले वातावरण में शिक्षा।
  2. भारतीय संस्कृति का प्रचार: भारतीय संगीत, नृत्य, कला और साहित्य का अध्ययन।
  3. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा का केंद्र: रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे एक ऐसा स्थान बनाया, जहाँ भारत और अन्य देशों के छात्र-छात्राएँ साथ मिलकर पढ़ सकें।
  4. महान विभूतियाँ: शांतिनिकेतन से कई प्रतिष्ठित व्यक्ति जुड़े, जैसे नंदलाल बोस, अमर्त्य सेन, और कई अन्य।

आज का महत्व:

  • शांतिनिकेतन आज भी भारतीय संस्कृति और शिक्षा का एक प्रतीक है।
  • यह स्थान युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बनने की ओर अग्रसर है।
  • यहाँ की कला, साहित्य और शिक्षा प्रणाली आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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आत्मत्राण
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कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
'विपदाओं से मुझे बचाओं, यह मेरी प्रार्थना नहीं' − कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
अंत में कवि क्या अनुनय करता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
'आत्मत्राणशीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती हैयदि हाँतो कैसे?


निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।


निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर वंचना रही
तो भी मन में ना मानूँ क्षय।


निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
तरने की हो शक्ति अनामय
मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।


रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीतों की रचना की है। उनके गीत-संग्रह में से दो गीत छाँटिए और कक्षा में कविता-पाठ कीजिए।


अनेक अन्य कवियों ने भी प्रार्थना गीत लिखे हैं, उन्हें पढ़ने का प्रयास कीजिए; जैसे

  1. महादेवी वर्मा- क्या पूजा क्या अर्चन रे!
  2. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला- दलित जन पर करो करुणा।
  3. इतनी शक्ति हमें देना दाता
    मन का विश्वास कमज़ोर हो न
    हम चलें नेक रस्ते पर हम से
    भूल कर भी कोई भूल हो न

इसे प्रार्थना को ढूँढ़कर पूरा पढ़िए और समझिए कि दोनों प्रार्थनाओं में क्या समानता है? क्या आपको दोनों में कोई भी अंतर प्रतीत होता है? इस पर आपस में चर्चा कीजिए।


रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।


रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी.डी. सुनिए।


‘आत्मत्राण’ कविता में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।


“आत्मत्राण’ कविता हमें दुख से संघर्ष करने का मार्ग दिखाती है। स्पष्ट कीजिए।


'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है - 


'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है?


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