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रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी.डी. सुनिए।

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Question

रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी.डी. सुनिए।

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Solution

रवींद्र संगीत का परिचय एवं सांगीतिक वैशिष्ट्य:

  • रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित लगभग 2,230 गीतों और उनकी विशिष्ट गायन पद्धति को 'रवींद्र संगीत' कहा जाता है। यह भारतीय संगीत की एक स्वतंत्र और सशक्त धारा है।
  • रवींद्र संगीत में भारतीय शास्त्रीय संगीत (विशेषकर ध्रुपद, खयाल व ठुमरी), बंगाल के पारंपरिक संगीत (बाउल, कीर्तन और भाटियाली) तथा पाश्चात्य धुनों का अद्भुत और कर्णप्रिय संगम पाया जाता है।
  • इन गीतों को मुख्य रूप से छह वर्गों में बाँटा गया है: पूजा (ईश्वर-भक्ति), प्रेम, प्रकृति (ऋतु-वर्णन), स्वदेश (देशभक्ति), विचित्र (दार्शनिक व विविध भाव) और अनुष्ठानिक।

रवींद्र संगीत का श्रवण मन को शांत, अंतर्मुखी और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण करता है।

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आत्मत्राण
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Chapter 1.9: आत्मत्राण - परियोजना कार्य [Page 40]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.9 आत्मत्राण
परियोजना कार्य | Q 4. | Page 40

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'विपदाओं से मुझे बचाओं, यह मेरी प्रार्थना नहीं' − कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि सहायक के न मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'आत्मत्राण' शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आप प्रार्थना के अतिरिक्त और क्या-क्या प्रयास करते हैं? लिखिए।


निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।


निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर वंचना रही
तो भी मन में ना मानूँ क्षय।


रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीतों की रचना की है। उनके गीत-संग्रह में से दो गीत छाँटिए और कक्षा में कविता-पाठ कीजिए।


रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त है। उनके विषय में और जानकारी एकत्र कर परियोजना पुस्तिका में लिखिए।


रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।


‘दुख’ के संबंध में हमारी प्रार्थना और कवि की प्रार्थना में क्या अंतर है?


“आत्मत्राण’ कविता हमें दुख से संघर्ष करने का मार्ग दिखाती है। स्पष्ट कीजिए।


'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है - 


'आत्मत्राण' कविता में कवि किससे छुटकारा प्राप्त करना चाहता है?


'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है?


पद्य खंड पर आधारित प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

'आत्मत्राण' कविता की कौन-सी दो बातें आपको बहुत प्रेरित करती हैं और क्यों? अपने शब्दों में लिखिए।


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