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Question
'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है?
Options
दुःख का सामना करने हेतु सामर्थ्य
दुःख का सामना करने हेतु सांत्वना
दुःख का सामना करने हेतु करुणा
दुःख का सामना करने हेतु वंचना
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Solution
दुःख का सामना करने हेतु सामर्थ्य
व्याख्या:
आत्मत्राण कविता में कवि ने भगवान से साहस और आत्मबल की प्रार्थना की है। वह कहता है कि चाहे सभी लोग उसे धोखा दे दें और सभी दुख उसे घेर लें, लेकिन उसका भगवान के प्रति विश्वास कम न होने दे। वह भगवान के प्रति अपनी आस्था को बनाए रखने का अनुनय करता है। चाहे सुख के समय में भी, वह हर क्षण भगवान को याद करता रहे।
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कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
अंत में कवि क्या अनुनय करता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'आत्मत्राण' शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
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'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है -
पद्य खंड पर आधारित प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :
'आत्मत्राण' कविता की कौन-सी दो बातें आपको बहुत प्रेरित करती हैं और क्यों? अपने शब्दों में लिखिए।
