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प्रश्न
'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है?
विकल्प
दुःख का सामना करने हेतु सामर्थ्य
दुःख का सामना करने हेतु सांत्वना
दुःख का सामना करने हेतु करुणा
दुःख का सामना करने हेतु वंचना
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उत्तर
दुःख का सामना करने हेतु सामर्थ्य
व्याख्या:
आत्मत्राण कविता में कवि ने भगवान से साहस और आत्मबल की प्रार्थना की है। वह कहता है कि चाहे सभी लोग उसे धोखा दे दें और सभी दुख उसे घेर लें, लेकिन उसका भगवान के प्रति विश्वास कम न होने दे। वह भगवान के प्रति अपनी आस्था को बनाए रखने का अनुनय करता है। चाहे सुख के समय में भी, वह हर क्षण भगवान को याद करता रहे।
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