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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-तरने की हो शक्ति अनामयमेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।

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प्रश्न

निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
तरने की हो शक्ति अनामय
मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।

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उत्तर

कवि कामना करता है कि यदि प्रभु दुख दे तो उसे सहने की शक्ति भी दे। वह यह नहीं चाहता कि ईश्वर उसे इस दुख के भार को कम कर दे या सांत्वना दे। वह अपने जीवन की ज़िम्मेदारियों को कम करने के लिए नहीं कहता बल्कि उससे संघर्ष करने, उसे सहने की शक्ति के लिए प्रार्थना करता है।

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आत्मत्राण
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अध्याय 1.9: आत्मत्राण - प्रश्न-अभ्यास (ख) [पृष्ठ ४९]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 1.9 आत्मत्राण
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 3 | पृष्ठ ४९

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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
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रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त है। उनके विषय में और जानकारी एकत्र कर परियोजना पुस्तिका में लिखिए।


रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।


रवींद्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता (कोलकाता) के निकट एक शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी। पुस्तकालय की मदद से उसके विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।


रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी.डी. सुनिए।


'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है - 


'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है?


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