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'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है -

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प्रश्न

'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है - 

विकल्प

  • प्रभु की सत्ता पर संदेह न करना।

  • प्रत्येक जीव में परमात्मा को देखना।

  • ईश्वर के दर्शनों की अभिलाषा रखना।

  • सत्मार्ग पर चलकर जीवन यापन करना।

MCQ
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उत्तर

प्रभु की सत्ता पर संदेह न करना।

shaalaa.com
आत्मत्राण
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2022-2023 (March) Sample

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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
अंत में कवि क्या अनुनय करता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
'आत्मत्राणशीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती हैयदि हाँतो कैसे?


निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।


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