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प्रश्न
रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त है। उनके विषय में और जानकारी एकत्र कर परियोजना पुस्तिका में लिखिए।
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उत्तर
रवींद्रनाथ ठाकुर (1861–1941) बहुआयामी प्रतिभा के धनी, विश्वविख्यात कवि, दार्शनिक, चित्रकार और साहित्यकार थे।
1. जीवन परिचय:
- उनका जन्म 6 मई 1861 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार में हुआ था।
- उनकी आरंभिक शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से घर पर ही संपन्न हुई।
2. साहित्यिक एवं कलात्मक अवदान:
- उन्होंने लगभग एक हजार कविताएँ, दो हजार से अधिक गीत, दर्जनों उपन्यास, नाटक और कहानियाँ लिखीं।
- 'काबुलीवाला', 'गोरा', 'घरे बाइरे' और 'चोखेर बाली' उनकी कालजयी रचनाएँ हैं।
- जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्होंने चित्रकला के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व योगदान दिया।
3. नोबेल पुरस्कार:
- वर्ष 1913 में उनकी अमर काव्यकृति 'गीतांजलि' (Geetanjali) के लिए उन्हें साहित्य का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। वे यह सम्मान पाने वाले प्रथम भारतीय एवं प्रथम एशियाई थे।
4. अद्वितीय ऐतिहासिक उपलब्धि:
- वे विश्व के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएँ दो स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रगान बनीं, भारत का ‘जन गण मन’ तथा बांग्लादेश का ‘आमार सोनार बांग्ला’।
रवींद्रनाथ ठाकुर का मानवतावादी दृष्टिकोण, प्रकृति-प्रेम और विश्व-बंधुत्व का संदेश आज भी संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन करता है।
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कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?
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'विपदाओं से मुझे बचाओं, यह मेरी प्रार्थना नहीं' − कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
अंत में कवि क्या अनुनय करता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'आत्मत्राण' शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आप प्रार्थना के अतिरिक्त और क्या-क्या प्रयास करते हैं? लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है? यदि हाँ, तो कैसे?
निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।
निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
तरने की हो शक्ति अनामय
मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।
अनेक अन्य कवियों ने भी प्रार्थना गीत लिखे हैं, उन्हें पढ़ने का प्रयास कीजिए; जैसे
- महादेवी वर्मा- क्या पूजा क्या अर्चन रे!
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- इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमज़ोर हो न
हम चलें नेक रस्ते पर हम से
भूल कर भी कोई भूल हो न
इसे प्रार्थना को ढूँढ़कर पूरा पढ़िए और समझिए कि दोनों प्रार्थनाओं में क्या समानता है? क्या आपको दोनों में कोई भी अंतर प्रतीत होता है? इस पर आपस में चर्चा कीजिए।
रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी.डी. सुनिए।
‘दुख’ के संबंध में हमारी प्रार्थना और कवि की प्रार्थना में क्या अंतर है?
‘सुख के दिन’ के संबंध में जन सामान्य और कवि के दृष्टिकोण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
‘आत्मत्राण’ कविता में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
'तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में' का भाव है -
'आत्मत्राण' कविता में कवि किससे छुटकारा प्राप्त करना चाहता है?
'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है?
पद्य खंड पर आधारित प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :
'आत्मत्राण' कविता की कौन-सी दो बातें आपको बहुत प्रेरित करती हैं और क्यों? अपने शब्दों में लिखिए।
