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ताप में 293 K से 313 K तक वृद्धि करने पर किसी अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानते हुए कीजिए कि इसका मान ताप के साथ परिवर्तित

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Question

ताप में 293 K से 313 K तक वृद्धि करने पर किसी अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानते हुए कीजिए कि इसका मान ताप के साथ परिवर्तित नहीं होता।

Numerical
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Solution

T1 = 293 K, T2 = 313 K

`log  "k"_2/"k"_1 = "E"_"a"/(2.303  "R") [("T"_2 - "T"_1)/("T"_1"T"_2)]`

Ea = `2.303  "R" ("T"_1"T"_2)/("T"_2 - "T"_1) log  "k"_2/"k"_1`

`("T"_1"T"_2)/("T"_2 - "T"_1) = (293  "K" xx 313  "K")/(313  "K" - 293  "K")` = 4585.45 K

`log  "k"_2/"k"_1 = log  4/1` = log 4 = 0.6021

Ea = 2.303 × 8.314 JK−1 mol−1 × 4585.45 K × 0.6021

= 52863 J mol−1

= 52.8 kJ mol−1

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अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता
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Chapter 3: रासायनिक बलगतिकी - अभ्यास [Page 90]

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NCERT Rasayan Bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12
Chapter 3 रासायनिक बलगतिकी
अभ्यास | Q 3.30 | Page 90

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विभिन्न तापों पर N2O5 के अपघटन के लिए वेग स्थिरांक नीचे दिए गए हैं –

T/°C 0 20 40 60 80
105 × k/s–1 0.0787 1.70 25.7 178 2140

In k एवं 1/T के मध्य ग्राफ खींचिए तथा A एवं Ea की गणना कीजिए। 30°C तथा 50°C पर वेग स्थिरांक को प्रागुक्त कीजिए।


546 K ताप पर एक हाइड्रोकार्बन के अपघटन में वेग स्थिरांक 2.418 × 10−5 s1 है। यदि सक्रियण ऊर्जा 179.9 kJ mol1 हो तो पूर्व-घातांकी गुणन का मान क्या होगा?


किसी अभिक्रिया \[\ce{A -> {उत्पाद}}\] के लिए k = 2.0 × 10−2 s1 है। यदि A की प्रारंभिक सांद्रता 1.0 mol L−1 हो तो 100 s पश्चात् इसकी सांद्रता क्या रह जाएगी?


अभिक्रिया A ⇌ B पर विचार कीजिए। अभिक्रियकों तथा उत्पादों दोनों ही की सांद्रता 'समय' के साथ चरघातांक से बढती है। निम्नलिखित में से कौन-सा चित्र अभिक्रियकों और उत्पादों की सांद्रता में समय के साथ परिवर्तन की सही व्याख्या करता है?


ऊजा के वितरण को दशाने वाले मैक्सवेल बोल्ट्जमान द्वारा दिए ग्राफ में ______।

  1. ताप में वृद्ध के साथ वक्र के अंतर्गत क्षेत्रफल स्थिर रहना चाहिए।
  2. ताप में वृद्ध के साथ वक्र के अंतर्गत क्षेत्रफल बढ़ता है।
  3. ताप में वुद्ध के साथ वक्र के अंतर्गत क्षेत्रफल घटता है।
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स्पष्ट कीजिए कि H2(g) तथा O2(g) के मध्य अभिक्रिया अति संभाव्य है परन्तु गैसों को एक ही पात्र में कमरे के ताप पर रखने से जल क्यों नहीं बनता।


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किसी अभिक्रिया के लिए केवल ऊष्मागतिक संभाव्यता अभिक्रिया के वेग को निर्धारित नहीं कर सकती। इसे एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।


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किसी अभिक्रिया के वेग नियम को हम संतुलित रासायनिक अभिक्रिया की सहायता से निर्धारित क्यों नहीं कर सकते?


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