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'पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण।' यह पंक्ति किस कविता से ली गई है और इसके माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

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Questions

‘पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

'पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण।' यह पंक्ति किस कविता से ली गई है और इसके माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

Short/Brief Note
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Solution

‘पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण’ यह पंक्ति 'एक दंतुरित मुसकान' कविता से ली गई है। इसके माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि शिशु की नवोदित मुसकान अत्यंत मनोहारी होती है। इससे प्रभावित हुए बिना व्यक्ति नहीं रह सकता है। इस मुसकान के वशीभूत होकर पत्थर जैसा कठोर हृदय वाला व्यक्ति भी पिघलकर पानी की तरह हो जाता है।

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यह दंतुरित मुसकान
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2022-2023 (March) Sample

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भाव स्पष्ट कीजिए -

छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।


भाव स्पष्ट कीजिए -

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“यह दंतुरित मुसकान’ कविता में कवि ने किन्हें धन्य कहा है और क्यों?


'दंतुरित मुस्कान' कविता में कवि को शिशु का धूल-धूसरित शरीर प्रतीत होता है?


पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

बच्चे की दंतुरित मुस्कान का किस-किस पर क्या-क्या प्रभाव पड़ता है? यह 'दंतुरित मुस्कान' कविता के आधार पर लिखिए।


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