Advertisements
Advertisements
Question
मुस्कान और क्रोध भिन्न-भिन्न भाव हैं। इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए।
Advertisements
Solution
मुसकान तथा क्रोध मानव स्वभाव के दो अलग-अलग रुप हैं, जो एक दूसरे से भिन्न हैं। इनसे वातावरण भी प्रभावित होता है -
- मुसकान - निश्छल तथा प्रेम पूर्ण मुसकान किसी के भी हृदय को मुग्ध कर सकता है, यह किसी का भी क्रोध कम करने में सक्षम है तथा यह मन की प्रसन्नता का प्रतीक है।
- क्रोध - क्रोध व्यक्ति के मन में चल रहे असंतोष की भावना है। क्रोध में व्यक्ति के सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
भाव स्पष्ट कीजिए -
छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।
भाव स्पष्ट कीजिए -
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल
बाँस था कि बबूल?
दंतुरित मुसकान से बच्चे की उम्र का अनुमान लगाइए और तर्क सहित उत्तर दीजिए।
बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्द-चित्र उपस्थित हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
‘मृतक में भी डाल देगी जान’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
यह दंतुरित मुसकान कविता में ‘बाँस और बबूल’ किसके प्रतीक बताए गए हैं? इन पर शिशु की मुसकान का के या असर होता है?
शिशु के धूल लगे शरीर को देखकर कवि को कैसा लगा?
शिशु किसे अनिमेष ताके जा रहा था और क्यों?
कवि शिशु की ओर से आँखें क्यों फेर लेना चाहता है?
‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता में कवि ने नारी को गरिमामय स्थान प्रदान किया है? इससे आप कितना सहमत हैं, स्पष्ट कीजिए।
“यह दंतुरित मुसकान’ कविता में कवि ने किन्हें धन्य कहा है और क्यों?
“धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात........
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात”
'तुम्हारी ये दंतुरित मुस्कान' से ली गई उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त बिम्ब को स्पष्ट कीजिए।
'दंतुरित मुस्कान' कविता में कवि को शिशु का धूल-धूसरित शरीर प्रतीत होता है?
