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'पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण।' यह पंक्ति किस कविता से ली गई है और इसके माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

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प्रश्न

‘पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

'पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण।' यह पंक्ति किस कविता से ली गई है और इसके माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

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उत्तर

‘पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण’ यह पंक्ति 'एक दंतुरित मुसकान' कविता से ली गई है। इसके माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि शिशु की नवोदित मुसकान अत्यंत मनोहारी होती है। इससे प्रभावित हुए बिना व्यक्ति नहीं रह सकता है। इस मुसकान के वशीभूत होकर पत्थर जैसा कठोर हृदय वाला व्यक्ति भी पिघलकर पानी की तरह हो जाता है।

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यह दंतुरित मुसकान
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