Advertisements
Advertisements
प्रश्न
आत्मकथा लिखने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होती है? कवि के लिए यह कार्य कठिन क्यों था? सोचकर लिखिए।
Advertisements
उत्तर
आत्मकथा लिखने की लिए व्यक्तित्व की विशालता के साथ-साथ सच्चाई, साहस और ईमानदारी की आवश्यकता होती है। लेखक के अंदर ये गुण तो थे, किंतु विनम्रता व महानता के कारण वे स्वयं के जीवन को आत्मकथा लिखने योग्य नहीं मानते थे, उन्हें लगता था कि अभी उन्होंने इतने बड़े कार्य नहीं किए हैं कि उनकी आत्मकथा में लोगों के लिए कुछ प्रेरणा हो।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?
आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ‘अभी समय भी नहीं’ कवि ऐसा क्यों कहता है?
स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?
भाव स्पष्ट कीजिए -
मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ - कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना जरूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रुप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।
‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं?
‘असंख्य जीवन-इतिहास’ कहकर कवि किस ओर संकेत करना चाहता है?
कवि के मित्र उससे क्या आग्रह कर रहे थे? वह इस आग्रह को पूरा क्यों नहीं करना चाहता था?
कवि को अपनी गागर रीती क्यों लगती है?
‘तुम ही खाली करने वाले’ के माध्यम से कवि किनसे, क्या कहना चाहता है?
कवि किसकी हँसी नहीं उड़ाना चाहता है और क्यों?
कवि ने अपनी तुलना किससे की है? उसके जीवन का पाथेय क्या है?
'आत्मकथ्य' से उद्धृत निम्नलिखित काव्य-पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए -
“उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।”
पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
'कथा के सीवन को उधेड़ने' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि कवि के लिए आत्मकथा लिखना सीवन उधेड़ने जैसा क्यों है?
