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भाव स्पष्ट कीजिए - मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

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प्रश्न

भाव स्पष्ट कीजिए -

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

स्पष्ट कीजिए
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उत्तर

कवि कहना चाहता है कि उसे वह सुख नहीं मिल सका जिसकी वह कल्पना कर रहा था। उसे सुख मिलते-मिलते रह गया। अर्थात् इस दुनिया में सुख छलावा मात्र है। हम जिसे सुख समझते हैं वह अधिक समय तक नहीं रहता है, स्वप्न की तरह जल्दी ही समाप्त हो जाता है।

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आत्मकथ्य
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अध्याय 4: जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ २०]

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 Class 10
अध्याय 4 जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
प्रश्न-अभ्यास | Q 4. (क) | पृष्ठ २०

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भाव स्पष्ट कीजिए -

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