हिंदी

‘अनुरागिनी उषा लेती थी, जिन सुहाग मधुमाया, में’ के आलोक में कवि ने अपनी पत्नी के विषय में क्या कहना चाहता है?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘अनुरागिनी उषा लेती थी, जिन सुहाग मधुमाया, में’ के आलोक में कवि ने अपनी पत्नी के विषय में क्या कहना चाहता है?

एक पंक्ति में उत्तर
Advertisements

उत्तर

‘अनुरागिनी उषा लेती थी, जिन सुहाग मधुमाया में’ के माध्यम से कवि ने यह कहना चाहा है कि उसकी पत्नी अत्यंत सुंदर थी। उसके कपोल इतने लाल और सुंदर थे कि प्रात:कालीन उषा भी उससे लालिमा लेकर अपनी सौंदर्य वृद्धि करती। थी अर्थात् कवि की पत्नी उषा से भी अधिक सुंदर थी।

shaalaa.com
आत्मकथ्य
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?

संबंधित प्रश्न

कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?


भाव स्पष्ट कीजिए -

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।


भाव स्पष्ट कीजिए -

जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।


‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ - कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?


आप किन व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे और क्यों?


‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं?


‘असंख्य जीवन-इतिहास’ कहकर कवि किस ओर संकेत करना चाहता है?


कवि के मित्र उससे क्या आग्रह कर रहे थे? वह इस आग्रह को पूरा क्यों नहीं करना चाहता था?


कवि को अपनी गागर रीती क्यों लगती है?


कवि के लिए सुख दिवास्वप्न बनकर रह गए, स्पष्ट कीजिए।


‘आत्मकथ्य’ कविता के माध्यम से ‘प्रसाद’ जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, वह उनकी ईमानदारी और साहस का प्रमाण है, स्पष्ट कीजिए।


आत्मकथा लिखने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होती है? कवि के लिए यह कार्य कठिन क्यों था? सोचकर लिखिए।


पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

'कथा के सीवन को उधेड़ने' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि कवि के लिए आत्मकथा लिखना सीवन उधेड़ने जैसा क्यों है?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×