Advertisements
Advertisements
प्रश्न
भाव स्पष्ट कीजिए -
जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
Advertisements
उत्तर
कवि अपनी प्रिय के सौंदर्य का वर्णन करते हुए यह कहते हैं, जिनके गालों में लालिमा और सुंदरता थी। कवि उषा की सुंदरता और उसकी मधुर ऊर्जा की तुलना नायक के रूप से करते हैं। इस प्रकार, नायक के रूप में भी वही आकर्षण और अनुपम सौंदर्य था जैसा उषा में था।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?
आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ‘अभी समय भी नहीं’ कवि ऐसा क्यों कहता है?
स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?
आप किन व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे और क्यों?
कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना जरूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रुप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।
‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं?
कवि के मित्र उससे क्या आग्रह कर रहे थे? वह इस आग्रह को पूरा क्यों नहीं करना चाहता था?
‘तुम ही खाली करने वाले’ के माध्यम से कवि किनसे, क्या कहना चाहता है?
कवि किसकी हँसी नहीं उड़ाना चाहता है और क्यों?
कवि ने अपने जीवन की उज्ज्वल गाथा किसे कहा है?
कवि के लिए सुख दिवास्वप्न बनकर रह गए, स्पष्ट कीजिए।
‘आत्मकथ्य’ कविता के माध्यम से ‘प्रसाद’ जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, वह उनकी ईमानदारी और साहस का प्रमाण है, स्पष्ट कीजिए।
'आत्मकथ्य' से उद्धृत निम्नलिखित काव्य-पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए -
“उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।”
पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
'आत्मकथ्य' में कवि आत्मकथा न लिखने के लिए जिन तर्कों का सहारा ले रहा है उनमें से किन्हीं दो का उल्लेख कीजिए।
पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
'कथा के सीवन को उधेड़ने' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि कवि के लिए आत्मकथा लिखना सीवन उधेड़ने जैसा क्यों है?
