Advertisements
Advertisements
प्रश्न
"वहीं सुख, शांति और सुकून है, जहाँ अखंडित संपूर्णता है। पेड़, पौधे, पशु और आदमी सब अपनी-अपनी लय, ताल और गति में हैं। हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की इस लय, ताल और गति से खिलवाड़ कर अक्षम्य अपराध किया है।" 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ के आधार पर बताइए कि इस अक्षम्य अपराध का प्रायश्चित मनुष्य किस प्रकार कर सकता है?
Advertisements
उत्तर
हमारी पीढ़ी ने प्रकृति का अंधाधुंध तरीके से दोहन किया है। उसने प्रदूषण व वृक्षों के कटाव से पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ा है। इससे प्रकृति की लय, ताल और गति बिगड़ी है, जिसके भयावह परिणाम सामने आ रहे हैं। मनुष्य को प्रकृति व पर्यावरण की कराह सुनकर उनके अनुकूल व्यवहार करना चाहिए। पर्यटन स्थलों पर 'प्रकृति मित्र' बनकर प्लास्टिक, पॉलीथिन आदि नहीं फेंकने चाहिए। "प्रकृति व पर्यावरण मित्र' की भूमिका संकल्पित होकर निभानी चाहिए।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखिए।
लोंग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी क्यों दिखाई दी?
इस यात्रा-वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के जिन-जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।
सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।
“कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।” इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?
आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए।
‘कटाओ’ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है। इस कथन के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कीजिए?
देश की सीमा पर बैठे फ़ौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते हैं? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए?
सुबह-सुबह बालकनी की ओर भागकर लेखिका के हाथ निराशा क्यों लगी? उसके निराश मन को हलकी-सी सांत्वना कैसे मिली?
‘कवी-लोंग-स्टॉक’ के बारे में जितेन नार्गे ने लेखिका को क्या बताया?
यूमथांग के रास्ते में दोनों ओर बिखरे असीम सौंदर्य को देखकर लेखिका एवं अन्य सैलानियों की प्रतिक्रिया किस तरह अलग थी?
लेखिका ने ‘छाया’ और ‘माया’ का अनूठा खेल किसे कहा है?
‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ में कहा गया है कि ‘कटाओ’ पर किसी दुकान का न होना वरदान है, ऐसा क्यों? भारत के अन्य प्राकृतिक स्थानों को वरदान बनाने में युवा नागरिकों की क्या भूमिका हो सकती है?
“हम सभी नदियों और पर्वतों के ऋणी है”- कैसे? ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ के संदर्भ में लिखिए कि प्राकृतिक जल संचय की व्यवस्था को कैसे सुधारा जा सकता है? इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर टिप्पणी कीजिए।
पूरक पाठ्पुस्तक के पाठ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए -
'मेहनतकश बादशाहों का शहर' किस शहर को कहा गया है और क्यों?
