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“हम सभी नदियों और पर्वतों के ऋणी है”- कैसे? ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

“हम सभी नदियों और पर्वतों के ऋणी है”- कैसे? ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

प्रकृति में जल संचय की व्यवस्था बहुत सुंदर है। सर्दियों में पहाड़ों पर गिरने वाली बर्फ, बर्फ के रूप में जल का संचय करती है। हिम-मंडित पर्वत-शिखर एक प्रकार के जल स्तंभ हैं जो गर्मियों में पिघलकर करोड़ों लोगों की प्यास बुझाते हैं।

नदियों के रूप में बहती यह जल धारा अपने किनारे बसे नगर तथा गाँवों में जल संसाधन के रूप में तथा नहरों के द्वारा एक विस्तृत क्षेत्र में सिंचाई करती है और अंत में सागर में जाकर मिल जाती हैं। सागर से फिर वाष्प के रूप में जल-चक्र की शुरुआत होती है। सचमुच हम सभी नदियों और पर्वतों के ऋणी हैं, जो परोपकार का कार्य करती हैं।

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साना-साना हाथ जोड़ि...
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2021-2022 (March) Delhi Set 1

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