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निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। आदमी उजड़ेंगे तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?

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Question

निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

आदमी उजड़ेंगे तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?

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Solution

इस पंक्ति में लेखक ने अमझर गाँव की दयनीय स्थिति का चित्रण किया है। अमरौली परियोजना की घोषणा के बाद वहाँ के पेड़-पौधे मुरझाने लगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध बहुत गहरा होता है। जब एक पर संकट आता है, तो उसका प्रभाव दूसरे पर भी पड़ता है। यदि लोग अपने गाँव छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएँगे, तो उनकी देखभाल के बिना पेड़ भी धीरे-धीरे नष्ट हो जाएँगे। जिस प्रकार मनुष्य का जीवन प्रकृति पर निर्भर है, उसी प्रकार प्रकृति का महत्व भी मानव के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। इसलिए दोनों का एक-दूसरे के बिना पूर्ण विकास संभव नहीं है।

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जहाँ कोई वापसी नहीं
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Chapter 2.06: निर्मल वर्मा (जँहा कोई वापसी नहीं) - प्रश्न-अभ्यास [Page 114]

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NCERT Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
Chapter 2.06 निर्मल वर्मा (जँहा कोई वापसी नहीं)
प्रश्न-अभ्यास | Q 8. (क) | Page 114

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निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

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पाठ के संदर्भ में निम्नलिखित अभिव्यक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए-

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औद्योगीकरण ने पर्यावरण को कैसे प्रभावित किया है? "जहाँ कोई वापसी नहीं" पाठ के आधार पर बताइए।


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

विकास का यह ‘उजला’ पहलू अपने पीछे कितने व्यापक पैमाने पर विनाश का अंधेरा लेकर आया था, हम उसका छोटा-सा जायज़ा लेने दिल्‍ली में स्थित ‘लोकायन’ संस्था की ओर से सिंगरौली गए थे। सिंगरौली जाने से पहले मेरे मन में इस तरह का कोई सुखद भ्रम नहीं था कि औद्योगीकरण का चक्का, जो स्वतंत्रता के बाद चलाया गया, उसे रोका जा सकता है। शायद पैंतीस वर्ष पहले हम कोई दूसरा विकल्प चुन सकते थे, जिसमें मानव सुख की कसौटी भौतिक लिप्सा न होकर जीवन की जरूरतों द्वारा निर्धारित होती। पश्चिम जिस विकल्प को खो चुका था भारत में उसकी संभावनाएँ खुली थीं, क्योंकि अपनी समस्त कोशिशों के बावजूद अंग्रेजी राज हिंदुस्तान को संपूर्ण रूप से अपनी ‘सांस्कृतिक कॉलोनी’ बनाने में असफल रहा था।

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

मेरे लिए एक दूसरी दृष्टि से भी यह अनूठा अनुभव था। लोग अपने गाँवों से विस्थापित होकर कैसी अनाथ, उन्मूलित ज़िंदगी बिताते हैं, यह मैंने हिंदुस्तानी शहरों के बीच बसी मज़दूरों की गंदी, दम घुटती, भयावह बस्तियों और स्लम्स में कई बार देखा था, किंतु विस्थापन से पूर्व वे कैसे परिवेश में रहते होंगे, किस तरह की ज़िंदगी बिताते होंगे, इसका दृश्य अपने स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में पहली बार अमझर गाँव में देखने को मिला।

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