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आधुनिक भारत के ‘नए शरणार्थी’ किन्हें कहा गया है?

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Question

आधुनिक भारत के ‘नए शरणार्थी’ किन्हें कहा गया है?

Long Answer
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Solution

आधुनिक भारत के ‘नए शरणार्थी’ उन हजारों ग्रामीण लोगों को कहा गया है, जिन्हें विकास और आधुनिकता की परियोजनाओं के कारण अपने गाँव छोड़ने पड़े। देश की प्रगति के लिए उन्हें अपने घर, खेत, खलिहान और पुश्तैनी जमीन से दूर होना पड़ा। वे विस्थापन की उस पीड़ा को सह रहे हैं, जो औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप उन्हें मिली है। उद्योगों के विस्तार ने उन्हें उनकी जड़ों से हमेशा के लिए अलग कर दिया है। अब जहाँ भी उनका पुनर्वास होगा, वहाँ उनकी स्थिति नए शरणार्थियों के समान होगी।

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जहाँ कोई वापसी नहीं
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Chapter 2.06: निर्मल वर्मा (जँहा कोई वापसी नहीं) - प्रश्न-अभ्यास [Page 114]

APPEARS IN

NCERT Hindi Antara Bhag 2 Class 12
Chapter 2.06 निर्मल वर्मा (जँहा कोई वापसी नहीं)
प्रश्न-अभ्यास | Q 2. | Page 114

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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

विकास का यह ‘उजला’ पहलू अपने पीछे कितने व्यापक पैमाने पर विनाश का अंधेरा लेकर आया था, हम उसका छोटा-सा जायज़ा लेने दिल्‍ली में स्थित ‘लोकायन’ संस्था की ओर से सिंगरौली गए थे। सिंगरौली जाने से पहले मेरे मन में इस तरह का कोई सुखद भ्रम नहीं था कि औद्योगीकरण का चक्का, जो स्वतंत्रता के बाद चलाया गया, उसे रोका जा सकता है। शायद पैंतीस वर्ष पहले हम कोई दूसरा विकल्प चुन सकते थे, जिसमें मानव सुख की कसौटी भौतिक लिप्सा न होकर जीवन की जरूरतों द्वारा निर्धारित होती। पश्चिम जिस विकल्प को खो चुका था भारत में उसकी संभावनाएँ खुली थीं, क्योंकि अपनी समस्त कोशिशों के बावजूद अंग्रेजी राज हिंदुस्तान को संपूर्ण रूप से अपनी ‘सांस्कृतिक कॉलोनी’ बनाने में असफल रहा था।

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

मेरे लिए एक दूसरी दृष्टि से भी यह अनूठा अनुभव था। लोग अपने गाँवों से विस्थापित होकर कैसी अनाथ, उन्मूलित ज़िंदगी बिताते हैं, यह मैंने हिंदुस्तानी शहरों के बीच बसी मज़दूरों की गंदी, दम घुटती, भयावह बस्तियों और स्लम्स में कई बार देखा था, किंतु विस्थापन से पूर्व वे कैसे परिवेश में रहते होंगे, किस तरह की ज़िंदगी बिताते होंगे, इसका दृश्य अपने स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में पहली बार अमझर गाँव में देखने को मिला।

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