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Question
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
फ़िल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण किसने किया था?
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Solution
'तीसरी कसम' फ़िल्म का निर्माण 'शैलेन्द्र' ने किया था?
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RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
फ़िल्म 'श्री 420' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।
फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।
लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।
शैलेंद्र ने अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए दवा किया?
‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?
शैलेंद्र द्वारा बनाई गई फ़िल्म चल रहीं, इसके कारण क्या थे?
‘रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी नयाँ’ इस पंक्ति के रेखांकित अंश पर किसे आपत्ति थी और क्यों?
‘तीसरी कसम’ में राजकपूर और वहीदा रहमान का अभिनय लाजवाब था। स्पष्ट कीजिए।
हिंदी फ़िल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म बनाना कठिन और जोखिम का काम है।’ स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए:
| राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफ़लता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान् फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिनक यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि “तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज नहीं थी। |
- राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था?
(a) फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
(b) फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
(c) फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से।
(d) फ़िल्म की संभावित असफ़लता के खतरों से। - शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है?
(a) कुशल फ़िल्म निर्माता
(b) प्रसिद्ध गीतकार
(c) आदर्शवादी भावुक कवि
(d) आत्म-संतुष्ट व्यक्ति - 'तीसरी कसम' फिल्म का दुःखद सत्य क्या था?
(a) फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
(b) लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
(c) फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
(d) फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना। - गंद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है:
(a) अधिक-से-अधिक धन कमाना।
(b) संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
(c) अधिक-से-अधिक मुनाफ़ा कमाना।
(d) संख्याओं को गुणा करने का हिसाब। - “उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।” पंक्ति का आशय है -
(a) यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(b) यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(c) यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(d) यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
उत्कृष्ट होते हए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म सिनेमाघरों में क्यो नहीं चली?
