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Question
लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।
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Solution
निर्देश: यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है। प्रत्येक क्षेत्र की भाषा और संस्कृति के अनुसार लोकगीत अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए विद्यार्थी अपने-अपने क्षेत्र के किन्हीं दो-तीन पारंपरिक लोकगीतों का संकलन करें।
सुझाव: अपने घर के बड़े-बुजुर्गों (माता-पिता, दादा-दादी) से चर्चा करके विभिन्न अवसरों (जैसे विवाह, बच्चे के जन्म, तीज-त्योहार या ऋतुओं) पर गाए जाने वाले लोकगीतों की जानकारी लें और उनकी 4-6 पंक्तियाँ अपनी परियोजना पुस्तिका में लिखें।
नमूना उत्तर (केवल मार्गदर्शन के लिए):
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गीत का प्रकार: कजरी (सावन/वर्षा ऋतु का लोकगीत - उत्तर भारत) पंक्तियाँ: 'घिर आई है कारी बदरिया, राधे बिन लागे न मोरा जिया। रिमझिम-रिमझिम बरसे पनिया, भीजे सखी मोरी चुनरिया...'
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गीत का प्रकार: सोहर (संतान जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला गीत) पंक्तियाँ: 'जुग-जुग जियसु ललनवा, भवनवा के भाग जागल हो... ललना लाल होइहें कुलवा के दीपक, मनवा में आस लागल हो...' (विद्यार्थी अपनी क्षेत्रीय भाषा या बोली के अनुसार अन्य लोकगीत लिख सकते हैं।)
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‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।
| क्र.सं. | फ़िल्म का नाम | साहित्यिक रचना | भाषा | रचनाकार |
|---|---|---|---|---|
| 1. | देवदास | देवदास | बंगला | शरत्चंद्र |
| 2. | ............. | ............. | ............. | ............. |
| 3. | ............. | ............. | ............. | ............. |
| 4. | ............. | ............. | ............. | ............. |
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