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Question
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।
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Solution
शैलेन्द्र के गीत सीधी-साधी भाषा में लिखे गए थे तथा सरसता व प्रवाह लिए हुए थे। इनके गीत भावनात्मक गहन विचारों वाले तथा संवेदनशील थे।
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RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
फ़िल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण किसने किया था?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
'तीसरी कसम' फ़िल्म को सेल्यूलाइड पर लिखी कविता क्यों कहा गया है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
लेखक के इस कथन से कि 'तीसरी कसम' फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
उनका यह दृढ़ मतंव्य था कि दर्शकों की रूचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्त्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रूचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।
समाचार पत्रों में फ़िल्मों की समीक्षा दी जाती है। किन्हीं तीन फ़िल्मों की समीक्षा पढ़िए और तीसरी कसम’ फ़िल्म को देखकर इस फ़िल्म की समीक्षा स्वयं लिखने का प्रयास कीजिए।
‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।
| क्र. सं | फिल्म का नाम | साहित्यिक रचना | भाषा | रचनाकार |
| 1. | देवदास | देवदास | बंगला | शरतचंद्र |
| 2. | ______ | ______ | ______ | ______ |
| 3. | ______ | ______ | ______ | ______ |
संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?
राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ अपनी मित्रता? निर्वाह कैसे किया?
एक निर्माता के रूप में बड़े व्यावसायिक सा- युवा भी चकर क्यों खा जाते हैं?
राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ किस तरह यारउन्ना मस्ती की?
‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?
हिंदी फ़िल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म बनाना कठिन और जोखिम का काम है।’ स्पष्ट कीजिए।
‘राजकपूर जिन्हें समीक्षक और कलामर्मज्ञ आँखों से बात करने वाला मानते हैं’ के आधार पर राजकपूर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए:
| राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफ़लता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान् फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिनक यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि “तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज नहीं थी। |
- राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था?
(a) फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
(b) फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
(c) फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से।
(d) फ़िल्म की संभावित असफ़लता के खतरों से। - शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है?
(a) कुशल फ़िल्म निर्माता
(b) प्रसिद्ध गीतकार
(c) आदर्शवादी भावुक कवि
(d) आत्म-संतुष्ट व्यक्ति - 'तीसरी कसम' फिल्म का दुःखद सत्य क्या था?
(a) फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
(b) लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
(c) फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
(d) फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना। - गंद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है:
(a) अधिक-से-अधिक धन कमाना।
(b) संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
(c) अधिक-से-अधिक मुनाफ़ा कमाना।
(d) संख्याओं को गुणा करने का हिसाब। - “उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।” पंक्ति का आशय है -
(a) यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(b) यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(c) यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(d) यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
