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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए - उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।

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प्रश्न

निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

शैलेन्द्र के गीत सीधी-साधी भाषा में लिखे गए थे तथा सरसता व प्रवाह लिए हुए थे। इनके गीत भावनात्मक गहन विचारों वाले तथा संवेदनशील थे।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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अध्याय 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - लिखित (ग) [पृष्ठ ९५]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 [English] Class 10
अध्याय 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
लिखित (ग) | Q 5 | पृष्ठ ९५

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फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।


‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।

क्र. सं फिल्म का नाम साहित्यिक रचना भाषा रचनाकार
1. देवदास देवदास बंगला शरतचंद्र
2. ______ ______ ______ ______
3. ______ ______ ______ ______

राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ किस तरह यारउन्ना मस्ती की?


‘तीसरी कसम’ में राजकपूर और वहीदा रहमान का अभिनय लाजवाब था। स्पष्ट कीजिए।


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